Monday, September 28, 2026
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खाद के लिए किसान परेशान, कालाबाजारी के आरोपों के बीच ललितपुर में कृषि व्यवस्था पर सवाल

बारिश से बर्बाद फसल, महंगी DAP और अधिकारियों की कथित निष्क्रियता ने किसानों की बढ़ाई मुश्किलें।

ललितपुर जनपद में खेती-किसानी के सामने संकट लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। एक ओर बारिश ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, वहीं दूसरी ओर रबी की फसलों की तैयारी के बीच खाद की उपलब्धता, कथित कालाबाजारी और निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं। किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फसल प्राकृतिक आपदा की मार झेल रही है, तब खेती के लिए आवश्यक खाद भी उन्हें निर्धारित मूल्य पर और आसानी से क्यों नहीं मिल पा रही है? बाजार में DAP खाद की एक बोरी 1950 रुपये से लेकर 2250 रुपये तक बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह केवल मूल्य वृद्धि का मामला नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक मजबूरी का लाभ उठाने और कृषि व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला विषय है।

बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर, अब खाद का संकट बना नई मुसीबत

किसान वर्षभर खेतों में पसीना बहाकर अपनी फसल तैयार करता है। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों पर अपनी सीमित आय का बड़ा हिस्सा खर्च करता है। लेकिन जब प्राकृतिक आपदा उसकी फसल को नुकसान पहुंचाती है, तो उसकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर हो जाती है। ललितपुर जनपद में बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायतों के बीच किसानों को खाद की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जिन किसानों की फसल पहले ही प्रभावित हो चुकी है, उनके लिए दोबारा खेती की तैयारी करना आसान नहीं है। ऐसे समय में खाद की उपलब्धता और उचित मूल्य सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

1350 रुपये की निर्धारित कीमत और बाजार में 1950 से 2250 रुपये तक बिक्री की शिकायतें

DAP खाद की कीमतों को लेकर किसानों की शिकायतें बेहद गंभीर हैं। किसानों का कहना है कि निर्धारित दर पर मिलने वाली खाद के लिए उन्हें बाजार में अधिक रकम चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। शिकायतों के अनुसार, कुछ स्थानों पर DAP की एक बोरी 1950 रुपये से लेकर 2250 रुपये तक बेचे जाने की बात सामने आ रही है। यदि निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की पुष्टि होती है, तो संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

खाद की कालाबाजारी के आरोप, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है खेल?

ललितपुर जनपद में खाद की कालाबाजारी और ओवररेटिंग को लेकर उठ रही शिकायतें कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। किसानों का आरोप है कि खाद की आवश्यकता के समय उन्हें निर्धारित दर पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जबकि कुछ स्थानों पर अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि खाद की कमी के नाम पर कृत्रिम संकट पैदा किया जा रहा है, निर्धारित दर से अधिक रकम वसूली जा रही है या किसानों को अनावश्यक रूप से दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

शिकायतों पर अधिकारी मौन क्यों? जवाबदेही से कब तक बचेंगे जिम्मेदार?

किसानों की शिकायतों के बीच सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि उनके अनुसार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों द्वारा अपेक्षित संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। यदि किसान बार-बार अपनी समस्या लेकर विभागों के चक्कर लगा रहे हैं और उन्हें समाधान नहीं मिल रहा, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर विषय है। कृषि विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि खाद की ओवररेटिंग की शिकायतों पर अब तक कितनी जांच की गई, कितने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण हुआ, कितनी अनियमितताएं मिलीं और कितने मामलों में कार्रवाई की गई।

बारिश से नष्ट फसल का मुआवजा और खाद की समस्या, दोनों पर चाहिए ठोस कार्रवाई

बारिश से फसल को नुकसान पहुंचने के बाद किसान पहले ही आर्थिक दबाव में है। ऐसे में खाद की कीमतों में कथित अनियमितता और समय पर उपलब्धता का संकट उसकी स्थिति को और कठिन बना देता है। प्रशासन को इन दोनों समस्याओं को अलग-अलग फाइलों में सीमित करने के बजाय किसान की समग्र स्थिति को समझना चाहिए। जिन किसानों की फसल बारिश से प्रभावित हुई है, उनके खेतों का पारदर्शी सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। वास्तविक नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी, दुकानों के स्टॉक की हो जांच

खाद की उपलब्धता और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जनपद स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है। प्रशासन को प्रत्येक खाद विक्रेता के स्टॉक, बिक्री और आपूर्ति की नियमित जांच करनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसानों को खाद निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध हो और बिक्री के समय उन्हें रसीद दी जाए। प्रशासन को खाद की उपलब्धता और वितरण से संबंधित सूचना सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि किसानों को यह पता चल सके कि किस क्षेत्र में खाद उपलब्ध है और कहां आपूर्ति की आवश्यकता है।

क्या केवल निरीक्षण से खत्म हो जाएगी कालाबाजारी?


किसी भी विभाग में निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि अनियमितताओं को रोकना और व्यवस्था को सुधारना होता है। यदि खाद की दुकानों पर निरीक्षण किया जाता है, लेकिन उसके बाद भी ओवररेटिंग की शिकायतें जारी रहती हैं, तो निरीक्षण की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को यह देखना होगा कि निरीक्षण के दौरान केवल स्टॉक रजिस्टर और कागजी अभिलेखों की जांच की जा रही है या वास्तविक किसानों से भी जानकारी ली जा रही है


किसान की मजबूरी को व्यापार का अवसर बनाना बंद होना चाहिए

किसान खाद इसलिए नहीं खरीदता कि उसे किसी व्यापारिक वस्तु का संग्रह करना है, बल्कि इसलिए खरीदता है क्योंकि उसकी फसल और आजीविका उससे जुड़ी होती है। खेती का समय निकल जाने पर किसान के सामने नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। यही मजबूरी यदि किसी को अधिक कीमत वसूलने का अवसर देती है, तो यह कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। खाद की कीमतों में अनियमितता का सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ता है।

प्रशासन के सामने पांच बड़े सवाल

ललितपुर जनपद में खाद की समस्या को लेकर जिला प्रशासन और कृषि विभाग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए: जनपद में DAP खाद की कुल उपलब्धता कितनी है? 1950 से 2250 रुपये तक बिक्री की शिकायतों की जांच कहां तक पहुंची? बारिश से प्रभावित फसलों का सर्वेक्षण कितने गांवों में पूरा हुआ? खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए कितने निरीक्षण किए गए? किसानों की शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा क्या है?

किसान की आवाज को अनसुना करना व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता

लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासन का दायित्व जनता की समस्याओं का समाधान करना है। किसान अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालयों तक पहुंचता है, तो उसकी शिकायत को गंभीरता से सुनना और नियमानुसार कार्रवाई करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ललितपुर जनपद में खाद की उपलब्धता, कथित कालाबाजारी, ओवररेटिंग और बारिश से फसल नुकसान को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना चाहिए।

किसान को भाषण नहीं, खाद और न्याय चाहिए

ललितपुर के किसानों के सामने इस समय बारिश से फसल नुकसान, खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर कई गंभीर चुनौतियां हैं। DAP खाद की एक बोरी 1950 रुपये से लेकर 2250 रुपये तक बेचे जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। यदि निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली या कालाबाजारी की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। जिला प्रशासन और कृषि विभाग को किसानों की शिकायतों पर केवल आश्वासन देने के बजाय कार्रवाई के परिणाम सामने रखने चाहिए।

सवाल सिर्फ खाद की एक बोरी का नहीं है, सवाल किसान की मेहनत, उसकी आर्थिक सुरक्षा और खेती पर उसके भरोसे का है। जब किसान खेत में पसीना बहाकर देश का पेट भरता है, तो क्या व्यवस्था की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि उसे खाद के लिए भटकना न पड़े, अपनी ही फसल बचाने के लिए अधिक कीमत न चुकानी पड़े और उसकी शिकायत सरकारी दफ्तरों में धूल न खाती रहे?

किसान को राहत देना कोई एहसान नहीं, बल्कि व्यवस्था की जिम्मेदारी है। अब आवश्यकता है कि ललितपुर प्रशासन और कृषि विभाग किसानों की आवाज सुनें, शिकायतों की निष्पक्ष जांच करें और धरातल पर ऐसा समाधान सुनिश्चित करें, जिससे किसान को खाद भी मिले, उचित मूल्य भी और उसकी मेहनत का सम्मान भी।

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