Tuesday, September 29, 2026
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हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ ने पदोन्नति में आरक्षण पर रोक के निर्णय का किया कड़ा विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी

मूकनायक/सरिता रानी
पानीपत/हरियाणा

हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ ने प्रदेश सरकार के मानव संसाधन विभाग द्वारा दिनांक 03 अगस्त 2026 को जारी उन निर्देशों का कड़ा विरोध किया है, जिनके तहत माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में लंबित एलपीए के अंतिम निर्णय तक अनुसूचित जाति कर्मचारियों को ग्रुप ‘ए’ एवं ‘बी’ (प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी) के पदों पर पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने पर रोक लगा दी गई है।

संघ के राज्य प्रधान डॉ. दिनेश निम्बड़िया ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय एवं भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी एवं सामाजिक संगठनों के लंबे संघर्ष के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने 07 अक्टूबर 2023 को पदोन्नति में आरक्षण संबंधी निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों को चुनौती दिए जाने के बाद 01 अप्रैल 2025 को माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकार की नीति को सही ठहराते हुए केवल इतना निर्देश दिया था कि सरकार अनुसूचित जाति वर्ग में क्रीमी लेयर के संबंध में निर्णय ले।

डॉ. निम्बड़िया ने कहा कि न्यायालय के निर्णय के बाद सरकार के पास लगभग एक वर्ष का समय था, लेकिन इस अवधि में न तो क्रीमी लेयर के संबंध में कोई नीति बनाई गई और न ही अनुसूचित जाति कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया। इसके विपरीत सरकार ने एलपीए दायर कर अब पदोन्नति में आरक्षण पर ही रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती तो न्यायालय के अंतिम निर्णय तक “Subject to the final outcome of the LPA” के आधार पर पदोन्नतियां जारी रख सकती थी, जैसा कि अनेक मामलों में किया जाता है, लेकिन ऐसा न करके सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के प्रति अपनी नीयत स्पष्ट कर दी है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव शिक्षा विभाग में देखने को मिल रहा है। वर्षों से पदोन्नति में आरक्षण लागू न होने के कारण आज विभाग में अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य हो गया है। वर्तमान में शिक्षा विभाग में अनुसूचित जाति वर्ग से कोई भी डिप्टी डायरेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (DEEO), डाइट प्राचार्य तथा लगभग सभी खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पदों पर प्रतिनिधित्व नहीं है। यह स्थिति बताती है कि बिना पदोन्नति में आरक्षण के संवैधानिक प्रतिनिधित्व का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।

संघ के राज्य महासचिव विनोद मोहड़ी ने कहा कि सरकार पिछले लगभग एक वर्ष से इस मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखे हुए थी और जब अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारी एवं कर्मचारी पदोन्नति की अंतिम प्रक्रिया तक पहुंचने लगे, तभी अचानक आरक्षण पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया गया।

उन्होंने कहा कि तृतीय श्रेणी (Group ‘C’) की पदोन्नतियों में आरक्षण पर न तो कोई न्यायालयीन रोक है और न ही कोई कानूनी बाधा, फिर भी शिक्षा विभाग वर्षों से अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नतियां नहीं कर रहा। संघ द्वारा मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव, निदेशक सहित विभाग के उच्च अधिकारियों को अनेक बार ज्ञापन देने के बावजूद आज तक तृतीय श्रेणी की पदोन्नति सूची जारी नहीं की गई।

विनोद मोहड़ी ने कहा कि संघ लगातार विभाग से रोस्टर रजिस्टर सार्वजनिक करने तथा अनुसूचित जाति वर्ग के बैकलॉग पदों की पहचान कर विशेष पदोन्नति अभियान चलाने की मांग करता रहा है, लेकिन विभाग ने आज तक न तो रोस्टर रजिस्टर उपलब्ध कराया और न ही बैकलॉग भरने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई की। दूसरी ओर विभिन्न विभागों में हजारों आरक्षित पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं, जबकि ठेका व्यवस्था एवं अन्य माध्यमों से बिना आरक्षण के नियुक्तियां लगातार की जा रही हैं। इससे अनुसूचित जाति वर्ग का संवैधानिक प्रतिनिधित्व लगातार प्रभावित हो रहा है।

संघ ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही इस भेदभावपूर्ण निर्णय को वापस लेकर अनुसूचित जाति कर्मचारियों के पदोन्नति संबंधी अधिकारों की रक्षा नहीं करती, तो हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा।

इस संबंध में संघ ने निर्णय लिया है कि इसी सप्ताह राज्य कार्यकारिणी, जिला प्रधानों एवं प्रमुख पदाधिकारियों की एक राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। आंदोलन चरणबद्ध तरीके से खंड, जिला एवं राज्य स्तर पर चलाया जाएगा। साथ ही शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारी संगठनों, विभिन्न विभागों के अनुसूचित जाति कर्मचारी संगठनों तथा सामाजिक संगठनों को साथ लेकर व्यापक जनजागरण एवं संघर्ष अभियान चलाया जाएगा, ताकि अनुसूचित जाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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