Saturday, October 24, 2026
Homeहरियाणाबिजली कर्मचारियों की 22, 23 और 24 अक्टूबर की प्रस्तावित हड़ताल को...

बिजली कर्मचारियों की 22, 23 और 24 अक्टूबर की प्रस्तावित हड़ताल को सीटू का समर्थन

मूकनायक/सरिता रानी
पानीपत

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने बिजली कर्मचारियों के आंदोलन और 22, 23 व 24 अक्टूबर को प्रस्तावित हड़ताल का समर्थन किया है। हड़ताल के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और किसान-मजदूर संगठनों की ओर से केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर का पुतला दहन करने की भी घोषणा की गई है।

हड़ताल की तैयारियों को लेकर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य सचिव सुनील दत्त ने हरियाणा की मेहनतकश जनता से बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करने की अपील की।

सुनील दत्त ने कहा कि बिजली हमारे जीवन का अभिन्न अंग है और इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि देश के संविधान की भावना के अनुरूप जनता को बिजली उपलब्ध कराना कल्याणकारी व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन सरकार लगातार बिजली विभाग के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली आपूर्ति के लिए समानांतर व्यवस्था के तहत निजी कंपनी को 25 वर्ष के लिए लाइसेंस जारी किया गया है। बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल इसी व्यवस्था के विरोध में की जा रही है।

उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी अपने वेतन और भत्ते बढ़वाने के लिए हड़ताल नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका उद्देश्य बिजली विभाग का निजीकरण रोकना और किसानों तथा मजदूर परिवारों को सरकार की ओर से सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध करवाने की व्यवस्था को बनाए रखना है।

सुनील दत्त ने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारें बिजली विभाग को बड़े पूंजीपतियों के हवाले करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता की मेहनत और सार्वजनिक धन से बिजली विभाग का विशाल ढांचा खड़ा किया गया है। इसके अंतर्गत अरबों-खरबों रुपये की संपत्तियां और कीमती जमीनें हैं। उनके अनुसार, बिजली उत्पादन से लेकर वितरण तक निजी कंपनियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने स्मार्ट मीटर और प्रीपेड मीटर को भी निजीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनका कहना था कि प्रीपेड व्यवस्था के तहत आम जनता को मोबाइल रिचार्ज की तरह पहले पैसे जमा करवाकर बिजली लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है, जबकि वर्तमान में भी बिजली की दरें काफी महंगी हैं।

किसानों पर पड़ेगा सबसे अधिक असर

सुनील दत्त ने कहा कि निजीकरण का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ सकता है। किसानों को ट्यूबवेल के माध्यम से फसलों की सिंचाई के लिए मिलने वाली सब्सिडी वाली बिजली सबसे सस्ती पड़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण के जरिए किसानों से यह सुविधा छीनने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण पहले भी आम जनता को नुकसान उठाना पड़ा है।

उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की स्थिति कमजोर होने के बाद निजी कंपनियों का इस क्षेत्र में दबदबा बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मुफ्त सिम और इंटरनेट जैसी सुविधाएं देकर उपभोक्ताओं को आकर्षित किया गया और बाद में निजी कंपनियों का बाजार पर कब्जा मजबूत हो गया।

घरेलू रसोई गैस का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले उपभोक्ताओं को 350 से 400 रुपये तक मासिक सब्सिडी मिलती थी, जबकि अब उनके अनुसार आम जनता को मात्र दो से तीन रुपये मासिक सब्सिडी दी जा रही है।

सुनील दत्त ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से देश की मेहनतकश जनता निजी कंपनियों पर अधिक निर्भर होती जा रही है। उन्होंने हरियाणा की जनता से अपील की कि 22, 23 और 24 अक्टूबर को प्रस्तावित बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि जनता को सरकार के मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करवाना चाहिए। उनके अनुसार, बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध करना जनहित और देशहित का मुद्दा है।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments