मूकनायक/सरिता रानी
हरियाणा/ अम्बाला
हरियाणा के अंबाला जिले के धनयोड़ा गांव में खुले बोरवेल में गिरा चार वर्षीय मासूम निरवैर आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। लगभग 21 घंटे तक चले लगातार रेस्क्यू अभियान के बाद बुधवार तड़के करीब 3:25 बजे उसे 220 फीट गहरे बोरवेल से बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, निरवैर सुबह करीब 6:30 बजे अपने पिता के साथ खेत में काम कर रहे अपने दादा से मिलने गया था। खेत में खेलते समय खुले बोरवेल के आसपास की गीली मिट्टी धंस गई और वह गहरे बोरवेल में जा गिरा। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मासूम को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सेना, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) तथा प्रशासन की संयुक्त टीमों ने दिन-रात अथक प्रयास किए। रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों की सहायता से बच्चे तक पहुँचने की कोशिश की और मौत से एक-एक इंच की लड़ाई लड़ी।
पूरा प्रदेश ही नहीं, देशभर के लोग मासूम के सकुशल बाहर आने की दुआ कर रहे थे। घटनास्थल पर मौजूद माँ की सिसकियां और पिता की पथराई आँखें हर पल किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए थीं। लेकिन तड़के 3:25 बजे जब निरवैर को बाहर निकाला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और यह खबर सुनते ही घटनास्थल पर मातम छा गया।
जिस मासूम की किलकारियों से घर का आंगन गूंजता था, वह हमेशा के लिए खामोश हो गया। इस हृदयविदारक हादसे से पूरे धनयोड़ा गाँव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर आँख नम है।
यह दुखद घटना एक बार फिर खुले और असुरक्षित बोरवेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले बोरवेलों को समय रहते सुरक्षित रूप से बंद करना तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान इस तरह के हादसे की भेंट न चढ़े।

