मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन एक यात्रा है और इस यात्रा में सफलता का मार्ग कभी भी सीधा या आसान नहीं होता। जब हम असमंजस में होते हैं, तो हमें किसी ना किसी के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। माता-पिता, शिक्षक या शुभचिंतक हमें सही और गलत का अंतर बता सकते हैं, लेकिन उस रास्ते पर कदम हमें खुद ही आगे बढ़ाने होते हैं । मार्गदर्शन एक ‘नक्शे’ की तरह है। नक्शा हमें रास्ता तो दिखा सकता है, लेकिन वह हमें हमारी मंजिल तक पहुँचा नहीं सकता । मार्गदर्शन चाहे कितना भी श्रेष्ठ क्यों ना हो, यदि हम स्वयं प्रयास नहीं करेंगे, तो परिणाम शून्य ही रहेगा। “दिए की रोशनी सिर्फ रास्ता दिखा सकती है, सफर तो पैरों को ही तय करना पड़ता है।”
यहां यह सत्य है कि स्वयं के प्रयासों से मिली सफलता, जो आत्मविश्वास देती है, वह बैसाखियों के सहारे कभी नहीं मिल सकती। परिस्थितियाँ चाहे अनुकूल हों या प्रतिकूल, खुद का संघर्ष ही हमारे चरित्र को निखारता है। अर्जुन को कृष्ण का मार्गदर्शन प्राप्त था, लेकिन गांडीव उठाकर युद्ध खुद अर्जुन को ही लड़ना पड़ा था। इसलिए मार्गदर्शन का जीवन में बहुत महत्व है, यह हमें भटकने से बचाता है। परंतु, इसे केवल एक सहारा मानना चाहिए, गंतव्य नहीं। अंततः, हमारी सफलता हमारे अपने संकल्प, कड़े परिश्रम और लगन पर निर्भर करती है। कोई दूसरा हमारे हिस्से का संघर्ष नहीं कर सकता। इसलिए, मार्गदर्शन का सम्मान करें, लेकिन अपनी क्षमता पर भरोसा रखकर कदम आगे बढ़ाना सीखें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

