Tuesday, September 29, 2026
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भारतीय खेत मजदूर यूनियन ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपा मांगपत्र

मूकनायक/ सरिता रानी
पानीपत

भारतीय खेत मजदूर यूनियन (बीकेएमयू) के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त पानीपत के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम एक माँगपत्र सौंपकर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-GRAMG” का विरोध किया। यूनियन ने आरोप लगाया कि यह योजना ग्रामीण मजदूरों के रोजगार और अधिकारों को कमजोर करने वाली है तथा महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की मूल भावना के विपरीत है।
यूनियन के अनुसार मनरेगा ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है, जबकि VB-GRAMG के तहत प्रस्तावित नियम रोजगार को अधिकार आधारित व्यवस्था से हटाकर शर्तों और केंद्रीकृत नियंत्रण वाली योजना में बदल सकते हैं। माँगपत्र में कहा गया है कि इससे ग्राम सभाओं और पंचायतों की भूमिका कमजोर होगी तथा मजदूरों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे।
भारतीय खेत मजदूर यूनियन ने केंद्र सरकार से माँग की है कि VB-GRAMG से संबंधित नियमों और अधिसूचनाओं को तत्काल वापस लिया जाए तथा मनरेगा को पहले की तरह अधिकार आधारित रोजगार गारंटी कानून के रूप में मजबूत किया जाए। यूनियन ने मनरेगा में संशोधन कर स्वास्थ्य बीमा, मृत्यु अथवा स्थायी अपंगता की स्थिति में 10 लाख रुपये मुआवजा देने तथा रोजगार की गारंटी 200 दिन करने की भी माँग उठाई।
माँगपत्र में यह भी कहा गया कि प्रत्येक पंजीकृत मजदूर को प्रतिदिन 700 रुपये मजदूरी सुनिश्चित की जाए। यूनियन के नेताओं का कहना है कि खेती-किसानी के संकट, बढ़ती बेरोजगारी और ग्रामीण असमानता के दौर में रोजगार योजनाओं पर सरकारी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि मजदूरों और ग्रामीण गरीबों की माँगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो देशभर के खेत मजदूर अपने अधिकारों, सम्मान और आजीविका की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करने के लिए मजबूर होगें। इस अवसर पर यूनियन के जिला सचिव भूपेन्द्र कश्यप, कानूनी सलाहकार पवन कुमार सैनी, ब्रेकथ्रू संगठन के संजय कुमार, शीशराम तोमर, ओमप्रकाश कश्यप, धनपत सुताना आदि उपस्थित रहें।

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