मूकनायक समाचार । सूरत
सूरत सुमुल डेयरी के अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चयन किया गया। डेयरी के अध्यक्ष के तौर पर पहले बीजेपी सरकार में मंत्री रह चुके कांतिभाई गामित का चयन किया गया। जबकि उपाध्यक्ष के दौर पर भरतसिंह सोलंकी का चयन हुआ। सुमुल के पदाधिकारियों का चयन लंबे समय से नहीं हो रहा था। इसलिए दो-दो बार मिटिंग होने के बाद भी बीजेपी नेताओं में खिंचातानी रहती थी। आखिर गणेश विसर्जन के दिन ही बीजेपी के नेताओं के अहम का विसर्जन हुआ। सुमुल डेयरी के चूनाव में लंबे समय के बाद अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चयन किया गया।
विधानसभा चुनाव को अब एक वर्ष ही शेष रहा है। ऐसे में दक्षिण गुजरात के आदिवासी पट्टे में खुद का प्रभाव वापस बढाने के लिए बीजेपी ने राजकीय दाव खेला है। सुमुल डेयरी के साथ जुडे 78 प्रतिशत पशुपालकों, आदिवासी समाज के है। यह विशाल वोटबेंक और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए दक्षिण गुजरात की सबसे बडी सहकारी संस्थान सुमुल डेयरी की कमान एक आदिवासी नेता को सौंपी गई है। यह रणनीति के द्वारा भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्रों में वापस अपना प्रभाव बढाने व विश्वास बढाने का काम कर रही है। 17वीं जुलाई को घोषित हुए सुमुल डेयरी के व्यवस्थापक सदस्यों के चुनाव के परिणामों में 16 में से 15 बैठकों पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था। जोकि होद्देदारों के चयन में भारी खिंचातानी होने पर 17 जुलाई से 25 सितम्बर तक के समय में दो बार अध्यक्ष का चुनाव रद्द करना पडा था। आखिर यह लंबे अर्से का अंत आ गया है और अध्यक्ष पद पर सोनगढ के पूर्व विधायक और बीजेपी सरकार के पूर्व मंत्री कांतिभाई गामीत का चयन किया गया। एक कद्दावर आदिवासी नेता ने यह सर्वोच्च पद मिलने पर सहकारी संरचना के साथ साथ राजकीय समीकरण भी अकबंध रहा है।

