Tuesday, September 29, 2026
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प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को आत्ममंथन की प्रेरणा देता है : डॉ. प्रीतम सिंह

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी

शहीद उधम सिंह को भी किया नमन

मूकनायक/सरिता रानी
पानीपत/हरियाणा

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचंद जयंती के अवसर पर गणपति चंद्र गुप्त हॉल में “वर्तमान युग में प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान तथा महान क्रांतिकारी शहीद उधम सिहँ के बलिदान को स्मरण करते हुए वक्ताओं ने उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य वक्ता डॉ. प्रीतम सिहँ ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से औपनिवेशिक मानसिकता और शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध वैचारिक संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जनचेतना और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण बनाया। प्रेमचंद ने किसानों, मजदूरों, उपेक्षित और वंचित वर्ग के जीवन को साहित्य के केंद्र में स्थापित कर हिंदी साहित्य को नई दिशा दी।
कला एवं भाषा संकाय की अधिष्ठाता प्रो. सुनीता सिरोहा ने कहा कि प्रेमचंद ने समाज के यथार्थ स्वरूप को साहित्य में स्थान दिया। उनके साहित्य में सामाजिक विसंगतियां, आर्थिक असमानता, स्त्री की स्थिति, किसानों का संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। यही कारण है कि उनका साहित्य आज भी हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिहँ पूनिया ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद गांव की आत्मा की आवाज थे। उन्होंने भारतीय ग्रामीण समाज की पीड़ा, संघर्ष, संस्कृति और संवेदनाओं को साहित्य में प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। उनका साहित्य सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश देता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अतुल यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, राजकीय पी•जी• कॉलेज, अंबाला ने शहीद उधम सिहँ के जीवन और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे राष्ट्रभक्ति, साहस और संकल्प के अमर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उधम सिहँ के जीवन की दिशा बदल दी और वर्षों तक अपने संकल्प पर अडिग रहते हुए उन्होंने जनरल माइकल ओ’ड्वायर को गोली मारकर शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका जीवन युवाओं को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है।
संगोष्ठी के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रो. धर्मवीर सिरोही, डॉ. जसबीर, डॉ. गुरदीप, डॉ. रामचंद्र सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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