आदिवासी बच्चों को न्याय, शिक्षा-अधिकार और सामाजिक एकता की आवाज लेकर गांव-गांव पहुंचेगी यात्रा
मूकनायक समाचार -/ सत्यशील गोंडाने -/ बालाघाट (मध्यप्रदेश)
बालाघाट। सामाजिक समानता, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार 23 सितंबर को बालाघाट के अंबेडकर चौक से “सामाजिक परिवर्तन से व्यवस्था परिवर्तन” साइकिल यात्रा क आगाज किया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हुई यह यात्रा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों और गांवों तक पहुंचेगी। यात्रा के दौरान शिक्षा, अधिकार, प्रतिनिधित्व, सामाजिक समानता तथा आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर आमजन से संवाद किया जाएगा।
साइकिल यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व संगठन पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। इसके बाद “जय भीम” के नारों के बीच साइकिल यात्रा को रवाना किया गया।
शिक्षा, अधिकार और संविधान के प्रति जागरूकता का संकल्प
यात्रा की अगुवाई कर रहे युवा आदर्श बौद्ध ने बताया कि साइकिल यात्रा का प्रमुख उद्देश्य आदिवासी, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समाज के लोगों को शिक्षा, अधिकारों और संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही सामाजिक एकता एवं भाईचारे को मजबूत करने तथा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ वैचारिक जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जाएगा।
यात्रा के माध्यम से ओबीसी की जातिगत जनगणना, आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में न्याय तथा आबादी के अनुपात में अधिकार, अवसर एवं प्रतिनिधित्व की मांग को भी जन-जन तक पहुंचाने की बात कही गई है।
गांव-गांव होगा सीधा संवाद
साइकिल यात्रा के दौरान कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचकर आमजन से सीधा संवाद करेंगे। आयोजकों के अनुसार लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों, संविधान में दिए गए अधिकारों और सामाजिक कर्तव्यों के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
यात्रा का उद्देश्य केवल जनजागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि समतामूलक, लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण सामाजिक चेतना के निर्माण की दिशा में लोगों को जोड़ना भी बताया गया है। आयोजकों का कहना है कि सामाजिक जागरूकता और एकजुटता के माध्यम से व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
इन पड़ावों से होकर गुजरेगी साइकिल यात्रा
साइकिल यात्रा का निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार है—
*23 सितंबर — अंबेडकर चौक, बालाघाट से आगाज
24 सितंबर — डोंगरमाली
25 सितंबर — मोवाड़
26 सितंबर — मेंहकेपार
27 सितंबर — कटंगी
28 सितंबर — वारासिवनी
29 सितंबर — लालबर्रा
30 सितंबर — लामता
1 अक्टूबर — परसवाड़ा
2 अक्टूबर — बैहर
3 अक्टूबर — मलाजखंड
4 अक्टूबर — सालेटेकरी
5 अक्टूबर — देबरबेली
6 अक्टूबर — लांजी
7 अक्टूबर — भानेगांव
8 अक्टूबर — रजेगांव
9 अक्टूबर — हट्टा
हट्टा पहुंचने के बाद यात्रा वापस बालाघाट आएगी। वापसी के उपरांत विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की प्रमुख उपस्थिति में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी दी गई है।
आदिवासी बच्चों को न्याय की मांग भी यात्रा के केंद्र में
साइकिल यात्रा के दौरान आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर न्याय और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठाई जा रही है। आयोजकों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की आवाज को व्यापक स्तर पर सामने लाना और शासन-प्रशासन का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करना यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
यात्रा के माध्यम से सामाजिक संगठनों ने शिक्षा, संवैधानिक अधिकार, सामाजिक बराबरी, प्रतिनिधित्व और न्याय जैसे मुद्दों को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। अब देखना होगा कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने वाली यह यात्रा सामाजिक मुद्दों पर किस तरह का जनसंवाद और जागरूकता पैदा करती है।

