माहों, तना छेदक और ब्लास्ट का प्रकोप मिला—किसानों को जल निकासी, फसल उपचार और सुरक्षित कीटनाशक छिड़काव की दी समझाइश
मूकनायक समाचार -/ सत्यशील गोंडाने -/ बालाघाट (मध्यप्रदेश)
वारासिवनी। विकासखंड वारासिवनी के ग्राम मेंहदीवाड़ा में धान की फसल में कीट एवं रोगों के प्रकोप को लेकर कृषि विभाग का मैदानी अमला सक्रिय हुआ। कृषि विस्तार अधिकारी ने सोमवार को किसानों के खेतों एवं घरों तक पहुंचकर धान की फसल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई खेतों में माहों, तना छेदक तथा ब्लास्ट रोग के लक्षण पाए गए।
कृषि विस्तार अधिकारी ने किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार आवश्यक उपचार करने के साथ ही खेतों में लंबे समय तक पानी जमा नहीं रखने और उचित जल निकासी व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी।
खेत से पानी निकालने की दी सलाह
निरीक्षण के दौरान किसानों को बताया गया कि धान के खेत में आवश्यकता से अधिक पानी जमा रहने से फसल की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसलिए खेत का पानी खाली कर उचित जल निकासी सुनिश्चित की जाए। साथ ही फसल में दिखाई देने वाले कीट एवं रोग के प्रारंभिक लक्षणों की लगातार निगरानी करने की सलाह दी गई।
अधिकारी ने किसानों से कहा कि किसी भी कीट या रोग का प्रकोप दिखाई देने पर बिना जानकारी के दवा का प्रयोग करने के बजाय कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर अनुशंसित उपचार ही अपनाएं।
किसानों की दवाओं के पैकेट-बोतलों की भी जांच
निरीक्षण के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी ने किसानों द्वारा धान की फसल में उपयोग की जा रही कीटनाशक दवाओं के पैकेट एवं बोतलों की भी जांच की। यह देखा गया कि किसानों द्वारा फसल के लिए उपयुक्त एवं अनुशंसित दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है या नहीं।
किसानों को स्पष्ट रूप से समझाइश दी गई कि बिना सलाह किसी भी रासायनिक दवा का प्रयोग न करें तथा कीटनाशक की अनुशंसित मात्रा और निर्धारित विधि का ही पालन करें। दवा की मात्रा बढ़ाकर छिड़काव करने से बेहतर परिणाम मिलने की धारणा से बचने की भी सलाह दी गई।
कीटनाशक छिड़काव में सुरक्षा को बताया जरूरी
कृषि विभाग के अधिकारी ने किसानों को कीटनाशक छिड़काव के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी जागरूक किया। किसानों को सलाह दी गई कि छिड़काव करते समय हवा की दिशा का ध्यान रखें, ताकि दवा के कण शरीर या चेहरे की ओर न आएं।
छिड़काव के दौरान मास्क, चश्मे सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण पहनने की सलाह दी गई। साथ ही तेज धूप के समय रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करने के बजाय परिस्थितियों के अनुसार शाम के समय छिड़काव करने की समझाइश दी गई।
दवा छिड़काव के बाद साफ-सफाई पर जोर
किसानों को बताया गया कि कीटनाशक का छिड़काव पूरा होने के बाद हाथ-पैर और शरीर को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। कार्य समाप्त होने के बाद स्नान करने तथा उपयोग किए गए सुरक्षा उपकरणों एवं कपड़ों की उचित सफाई रखने की भी सलाह दी गई।
प्रारंभिक लक्षण दिखें तो तत्काल लें विशेषज्ञ की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में माहों, तना छेदक, ब्लास्ट अथवा अन्य कीट-रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही उन्हें नजरअंदाज न करें। समय रहते कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर फसल की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लें और उसी के अनुरूप कीटनाशक अथवा रोगनाशक दवाओं का उपयोग करें।
फसल बचाने के लिए समय पर पहचान, उचित जल निकासी और अनुशंसित उपचार को कृषि विभाग ने महत्वपूर्ण बताया है।

