मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के युग में अक्सर दौलत को केवल धन, संपदा, बंगले और गाड़ियों के पैमाने से मापा जाता है, लेकिन वास्तव में, भौतिक वस्तुएं केवल शारीरिक सुख सुविधाएं दे सकती हैं, मन की शांति और सच्ची खुशी नहीं। जीवन में दौलतमंद होने की कोई एक निश्चित परिभाषा नहीं होती। सच्चा धन वह है, जो इंसान को अंदर से समृद्ध, सुरक्षित और खुशहाल बनाए। हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने वाले और बिना किसी स्वार्थ के परवाह करने वाले मित्र जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। जब जीवन में कठिन समय आता है, तब धन से ज्यादा किसी सच्चे दोस्त का सहारा काम आता है।
ठीक इसी तरह, हमारे सुख-दुख के साझेदार पड़ोसी होते हैं। एक ऐसा पड़ोसी जो आपके दर्द को समझे और जरूरत के समय सबसे पहले मदद के लिए आगे आए, वह किसी अनमोल खजाने से कम नहीं है। इसके अलावा, रिश्तेदार जो आपको सम्मान दें और आपके अस्तित्व की कद्र करें, वे समाज में आपकी वास्तविक संपत्ति होते हैं। जहां रिश्तों में मिठास, आदर और अपनत्व हो, वहां इंसान खुद को मानसिक रूप से सबसे ज्यादा समृद्ध महसूस करता है। केवल बैंक बैलेंस होना ही अमीर होने का प्रमाण नहीं है। यदि आपके पास सच्चा प्रेम करने वाले दोस्त, संवेदनशील पड़ोसी और सम्मान देने वाले रिश्तेदार हैं, तो आप दुनिया के सबसे दौलतमंद व्यक्तियों में से एक हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

