Thursday, September 3, 2026
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जीवन में घटनाओं का संग्रह होना मात्र अस्तित्व है, जबकि आदर्शों के साथ जीना ही है वास्तविक जीवन

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बिना आदर्श के जीवन सिर्फ घटनाओं का संग्रह है। यह विचार मानव अस्तित्व की सबसे बड़ी सच्चाई को उजागर करता है। एक आदर्श रहित जीवन उस खाली लिफाफे की तरह है, जिस पर कोई पता नहीं लिखा होता। वह यात्रा तो करता है, लेकिन कहीं पहुँचता नहीं। आदर्श हमारे जीवन के वे मार्गदर्शक सिद्धांत हैं, जो हमें सही और गलत का अंतर समझाते हैं। जब किसी व्यक्ति के जीवन में कोई मूल्य, सिद्धांत या लक्ष्य नहीं होता, तो उसका जीवन केवल रोजमर्रा की घटनाओं का एक अंतहीन सिलसिला बनकर रह जाता है। सुबह उठना, काम पर जाना, भोजन करना और सो जाना—यह जीवन नहीं, केवल जैविक अस्तित्व है। ऐसे जीवन में कोई गहराई नहीं होती। जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, परिस्थितियाँ बदलती हैं, लेकिन व्यक्ति उनसे कुछ सीखकर आगे नहीं बढ़ता। वह बस एक सूखे पत्ते की तरह हवा के झोंकों के साथ यहाँ-वहाँ भटकता रहता है।
इसके विपरीत, एक आदर्शवादी जीवन में हर घटना का एक अर्थ होता है। चुनौतियाँ व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और सफलताएँ उसे विनम्र रखती हैं। डॉ भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, स्वामी विवेकानंद और डॉ. कलाम जैसे अनेक महापुरुषों का जीवन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने अपने जीवन को कुछ महान सिद्धांतों के साथ जिया, जिससे उनका जीवन केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया। इसलिए, यदि हम अपने जीवन को केवल दिनों को काटने का साधन नहीं, बल्कि एक सार्थक अनुभव बनाना चाहते हैं, तो हमें अपने जीवन में उच्च आदर्शों को स्थान देना ही होगा।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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