24 दिन का किसान आक्रोश, मंत्रियों ने करवाए अनशन पूर्ण, अब 3-4 माह के सरकारी वचन पूरा करने की कसौटी
जंगल, भूमि के मुद्दे 24 दिन का जंग पूर्ण, मंत्रियों ने पहुंचकर किसानों के अनशन समाप्त करवाएं
मूकनायक समाचार । डेडियापाडा (नर्मदा)
फूलसिंग वसावा
नर्मदा जिला के सागबारा तहसील के खोपी गांव में जगल, भूमि के मुद्दे अंतिम 24 दिन से अनशन पर बैठे आदिवासी किसानों के आंदोलन का आज सुखद अंत आ गया है। राज्य सरकार के वनमंत्री प्रवीण माळी, नर्मदा जिला प्रभारी मंत्री इश्वरसिंह पटेल तथा भरूच के सांसद मनसुख वसावा अनशन स्थल पर पहुंचे और किसानों के साथ चर्चा कर आंदोलन को समाप्त करवाया।
अनशन स्थल पहुंचे दोनों मंत्रियों और सांसदो ने किसानों से चर्चा करने के बाद सरकार की ओर से जंगल, भूमि संबंधित प्रश्न के लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया। सरकार की ओर से समग्र प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए आगामी 3 से 4 माह का समय लग सकता है, जिसके कारण किसानों ने जुताई समेत के मुद्दे पर आने वाले दिनों में सरकार की ओर से समग्र प्रक्रिया पूर्ण करने में आगामी 3 से 4 माह का समय लाग सकता है, जिसके कारण किसानों में जुताई समेत के मुद्दे अ्ब आगामी दिनों में सरकार की कार्रवाई और फैसले का इन्तजार करना पडेगा।
इस अवसर पर मंत्रियों ने खोपी गांव के सरपंच इश्वरभाई को पानी पीलाकर अनशन समाप्त करवाया। जिससे 24 दिनों से चल रहे अनशन का अंत आ गया है।
वनमंत्री प्रवीण माळी ने किसानों को जुताई के बाबत में आगामी दिनों में इंतजार करने की अपील की है। दूसरी ओर सांसद मनसुख वसावा ने बताया कि सागबारा के किसानों के आंदोलन के बाद राज्य में पेन्डिंग रहे तकरीबन 60 से 70 हजार दावाओं, अर्जीयों के लिए भी सरकार द्वारा संमति की प्रक्रिया शुरू कि जाएंगी।
जबकि 24 दिन से निरंतर अनशन पर बैठे बीजेपी के महिला अग्रणी लीलाबेन वसावा की तबियत बिगडने से उन्हे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया होने की जानकारी मिली। लीलाबेन की स्थिति और खोपी गांव के सरपंच इश्वरभाई बात करते हुए भावुक हुए।
अनशन का अंत आने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता संदीपसिंह मंगरोला, बीटीपी अग्रणी महेश वसावा समेत विभिन्न पक्षों के अग्रणी और स्थानिय लोगों ने सरकार के इस फैसले को स्वीकार किया।
24 दिन के लंबे आंदोलन के बाद सरकार और किसानों के बीच हुए समझौते से वर्तमान में जंगल, जमीन का विवाद शांत हुआ। अब सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के तहत आगामी 3 से 4 माह में प्रशासनिक प्रक्रिया तत्काल पूर्ण हो जाती है और किसानों की भूमि तथा जुताई के प्रश्नों का वास्तविक निकाल कब आएंगा उस पर नजर रहेंगी।

