मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में कुछ भी एक तरफा नहीं चलता। यह संसार ‘लेन-देन’ यानी संतुलन के शाश्वत नियम पर आधारित है। यदि हम किसी से कुछ पाने की इच्छा रखते हैं, तो हमें पहले वैसा ही कुछ लौटाने के लिए भी तत्पर रहना होगा। फिर चाहे वह प्रेम हो, पैसा हो या सम्मान, हर मोड़ पर यह नियम पूरी तरह लागू होता है। रिश्तों की सबसे सुंदर भाषा प्रेम है, लेकिन प्रेम केवल पाने की वस्तु नहीं है। यदि हम दूसरों से स्नेह और परवाह की उम्मीद करते हैं तो हमें अपने भीतर भी निःस्वार्थ भाव से प्रेम देना सीखना होगा। एकतरफा उम्मीदें अक्सर रिश्तों में कड़वाहट और दूरी का कारण बनती हैं। ठीक इसी तरह, सम्मान का भी यही सिद्धांत है—”सम्मान दीजिए और सम्मान पाइए।”
यदि हम दूसरों की भावनाओं, विचारों और अस्तित्व का आदर नहीं करेंगे, तो समाज से अपने लिए आदर की अपेक्षा रखना व्यर्थ है।आर्थिक जगत में भी यही नियम काम करता है। पैसा केवल तिजोरी में बंद रखने के लिए नहीं होता। जब हम व्यापार, सेवा या मदद के रूप में धन और ऊर्जा का प्रवाह बाहर की ओर करते हैं, तभी वह कई गुना होकर हमारे पास वापस लौटता है। देना केवल उपकार नहीं, बल्कि जीवन की खुशहाली का जरिया है। जीवन एक प्रतिध्वनि की तरह है। आप जो भी किसी को देते हैं, वही आपके पास वापस आता है। इसलिए, खुशहाल और संतुलित जीवन जीने के लिए केवल ‘लेने वाला’ नहीं, बल्कि खुले दिल से ‘देने वाला’ बनना भी बेहद जरूरी है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

