Tuesday, September 29, 2026
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जब मुश्किलें और दबाव आपको चारों तरफ से घेर लें, तो याद रखें कि नदी कभी अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपने निरंतर प्रयास और धैर्य से पत्थर को काटती है

मूकनायक /राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन का सफर हमेशा एक समान नहीं रहता। अक्सर ऐसा समय भी आता है, जब मुश्किलें और दबाव हमें चारों तरफ से घेर लेते हैं। ऐसे मानसिक और विपरीत हालातों में इंसान खुद को कमजोर और असहाय महसूस करने लगता है, लेकिन यही वह समय होता है, जब हमें प्रकृति के सबसे सुंदर और प्रेरणादायी इस नियम को याद रखना चाहिए कि “नदी कभी अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपने निरंतर प्रयास और धैर्य से पत्थर को काटती है।”
एक कठोर और विशाल पत्थर को देखकर पहली नजर में यही लगता है कि इसे कोई कोमल चीज नहीं बदल सकती। पानी की बूंदें बेहद शांत और नरम होती हैं, लेकिन जब वही पानी एक नदी का रूप लेकर बिना रुके, बिना थके साल-दर-साल उस पत्थर से टकराता है, तो अंततः पत्थर को भी अपना सीना चीरकर नदी को रास्ता देना ही पड़ता है।
हमारे जीवन की चुनौतियाँ भी इन पत्थरों की तरह ही कठोर होती हैं। जब हम किसी बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं तो असफलताएं, सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव हमें पीछे धकेलने की कोशिश करते हैं। ऐसे में जो व्यक्ति एक ही दिन में सब कुछ बदलने की कोशिश करता है, वह जल्दी थक जाता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति नदी की तरह शांत रहकर हर रोज छोटे-छोटे, लेकिन निरंतर प्रयास करता है, वह बड़ी से बड़ी बाधा को पार कर लेता है। धैर्य का अर्थ हाथ पर हाथ रखकर बैठना नहीं है, बल्कि कठिन समय में भी अपने कर्म पथ पर टिके रहना है। इतिहास गवाह है कि दुनिया के जितने भी महान वैज्ञानिक, खिलाड़ी या नेता हुए हैं, वे सभी अपनी जन्मजात ताकत से नहीं, बल्कि नदी जैसी अटूट निरंतरता से सफल हुए हैं। इसलिए, जब भी मुश्किलें आपको घेरें, घबराएं नहीं। अपने प्रयासों की गति धीमी भले ही रखें, लेकिन उन्हें कभी रुकने ना दें। आपका धैर्य और निरंतर परिश्रम एक दिन हर कठिन परिस्थिति का रुख बदल देगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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