Monday, September 28, 2026
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जब जब जनता की आवाज़ लंबे समय तक दबाई जाती है, तो वह खामोशी अंततः एक बड़े और हिंसक विद्रोह का ले लेती है रूप

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इतिहास गवाह है कि जब-जब जनता की आवाज़ को लंबे समय तक सत्ता, तानाशाही या दमनकारी व्यवस्था द्वारा दबाया जाता है, तो वह खामोशी किसी शांति का प्रतीक नहीं होती। वह एक गहरे, सुलगते हुए असंतोष का संकेत होती है। दबाव और अन्याय के साए में पनप रही यह खामोशी अंततः एक बड़े और हिंसक विद्रोह का रूप ले लेती है। मानव स्वभाव स्वभावतः स्वतंत्रता और न्याय की आकांक्षा रखता है। जब अभिव्यक्ति के सारे मार्ग बंद कर दिए जाते हैं और मूलभूत अधिकारों का हनन होता है, तो जनता के भीतर का धैर्य धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है। मरता क्या न करता” की यह स्थिति समाज को हिंसा की ओर धकेलती है। यह विद्रोह केवल सत्ता के खिलाफ नहीं होता, बल्कि उन तमाम व्यवस्थाओं के खिलाफ होता है, जो शोषण का जरिया बनी हुई हैं।
फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, श्रीलंका, नेपाल या दुनिया भर के अन्य स्वतंत्रता संग्राम इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जहाँ शासकों ने जनभावनाओं को कुचलने का प्रयास किया, लेकिन परिणाम स्वरूप उन्हें एक ऐसी हिंसक क्रांति का सामना करना पड़ा, जिसने पूरे साम्राज्य को उखाड़ फेंका। यह बदलाव अचानक नहीं होता। यह घड़े में बूंद-बूंद पानी भरने जैसा है, जो एक दिन लबालब होकर बहने लगता है। जब तक संवाद की गुंजाइश रहती है, तब तक शांतिपूर्ण समाधान संभव होता है, परंतु जब संवाद के सारे दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, तो वह ‘मौन’ एक हिंसक ज्वालामुखी में बदल जाता है। अतः, किसी भी समाज या राष्ट्र की स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि जनसामान्य की आवाज़ को सुना जाए क्योंकि दबी हुई आवाज़ें जब मुखर होती हैं तो वे अपने साथ इतिहास बदलने का सामर्थ्य लेकर आती हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर का जन्म दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया।मूकनायक/डॉ. जी. पी. मानव/संपादक, उन्नाव, उत्तर प्रदेश।उन्नाव। मानव विकास संस्थान के तत्वावधान में ग्राम चांदपुर झलिहई, नवाबगंज, हसनगंज, उन्नाव में 17 सितम्बर को पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर का जन्म दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिनेश कुमार ने की। मुख्य अतिथि मानव विकास संस्थान के संस्थापक-अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त उप प्राचार्य डॉ. जी. पी. मानव रहे। संस्थान के संरक्षक आर. आर. बौद्ध एवं राकेश विद्यार्थी विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमाशंकर ने किया।कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य भंते विवेक दीप एवं भंते अशोक दीप के मार्गदर्शन में तथागत भगवान गौतम बुद्ध, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर के छायाचित्रों पर मुख्य अतिथि सहित उपस्थित गणमान्य नागरिकों द्वारा पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित लोगों ने बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील का पाठ ग्रहण किया।इसके पश्चात राकेश विद्यार्थी ने पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर के जीवन, सामाजिक संघर्ष और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। आर. आर. बौद्ध ने पेरियार द्वारा चलाए गए आत्मसम्मान आंदोलन के उद्देश्य एवं उसके सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।श्याम चंद्र वर्मा ने कहा कि पेरियार ने धार्मिक कर्मकांड, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों तथा जन्म आधारित ऊंच-नीच की व्यवस्था के विरुद्ध जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने समाज में समानता, तर्कशीलता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करने का निरंतर प्रयास किया।मुख्य अतिथि डॉ. जी. पी. मानव ने कहा कि पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर आधुनिक भारत के प्रमुख सामाजिक क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने अपना जीवन जाति व्यवस्था, सामाजिक वर्चस्व, अंधविश्वास, पाखंड, रूढ़ियों और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष में समर्पित किया। वे तर्कशीलता, मानवतावाद और आत्मसम्मान के प्रबल समर्थक थे।उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक स्वतंत्रता भी आवश्यक है। जब तक मनुष्य जाति, वर्ण, अंधविश्वास तथा जन्म आधारित ऊंच-नीच की मानसिकता से मुक्त नहीं होता, तब तक स्वतंत्रता अधूरी रहती है। पेरियार का सामाजिक चिंतन समानता, आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा के प्रश्नों को केंद्र में रखता था। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. दिनेश कुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रत्येक गांव में आयोजित होने चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने जीवन और सामाजिक कार्यों में तर्क, विवेक एवं बौद्धिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं मानव विकास संस्थान के पूर्व तहसील अध्यक्ष सुनील कुमार ने मुख्य अतिथि, भंतेगण, वक्ताओं, गणमान्य नागरिकों तथा उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर कमलेश कुमार, मुजीब खान, रामस्वरूप, अनुज कुमार, बृज किशोर तथा डॉ. मेवालाल लोधी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।
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