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पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर का जन्म दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया।मूकनायक/डॉ. जी. पी. मानव/संपादक, उन्नाव, उत्तर प्रदेश।उन्नाव। मानव विकास संस्थान के तत्वावधान में ग्राम चांदपुर झलिहई, नवाबगंज, हसनगंज, उन्नाव में 17 सितम्बर को पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर का जन्म दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिनेश कुमार ने की। मुख्य अतिथि मानव विकास संस्थान के संस्थापक-अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त उप प्राचार्य डॉ. जी. पी. मानव रहे। संस्थान के संरक्षक आर. आर. बौद्ध एवं राकेश विद्यार्थी विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमाशंकर ने किया।कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य भंते विवेक दीप एवं भंते अशोक दीप के मार्गदर्शन में तथागत भगवान गौतम बुद्ध, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर के छायाचित्रों पर मुख्य अतिथि सहित उपस्थित गणमान्य नागरिकों द्वारा पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित लोगों ने बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील का पाठ ग्रहण किया।इसके पश्चात राकेश विद्यार्थी ने पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर के जीवन, सामाजिक संघर्ष और उनके विचारों पर प्रकाश डाला। आर. आर. बौद्ध ने पेरियार द्वारा चलाए गए आत्मसम्मान आंदोलन के उद्देश्य एवं उसके सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।श्याम चंद्र वर्मा ने कहा कि पेरियार ने धार्मिक कर्मकांड, अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों तथा जन्म आधारित ऊंच-नीच की व्यवस्था के विरुद्ध जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने समाज में समानता, तर्कशीलता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करने का निरंतर प्रयास किया।मुख्य अतिथि डॉ. जी. पी. मानव ने कहा कि पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर आधुनिक भारत के प्रमुख सामाजिक क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने अपना जीवन जाति व्यवस्था, सामाजिक वर्चस्व, अंधविश्वास, पाखंड, रूढ़ियों और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष में समर्पित किया। वे तर्कशीलता, मानवतावाद और आत्मसम्मान के प्रबल समर्थक थे।उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक स्वतंत्रता भी आवश्यक है। जब तक मनुष्य जाति, वर्ण, अंधविश्वास तथा जन्म आधारित ऊंच-नीच की मानसिकता से मुक्त नहीं होता, तब तक स्वतंत्रता अधूरी रहती है। पेरियार का सामाजिक चिंतन समानता, आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा के प्रश्नों को केंद्र में रखता था। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. दिनेश कुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रत्येक गांव में आयोजित होने चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने जीवन और सामाजिक कार्यों में तर्क, विवेक एवं बौद्धिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं मानव विकास संस्थान के पूर्व तहसील अध्यक्ष सुनील कुमार ने मुख्य अतिथि, भंतेगण, वक्ताओं, गणमान्य नागरिकों तथा उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर कमलेश कुमार, मुजीब खान, रामस्वरूप, अनुज कुमार, बृज किशोर तथा डॉ. मेवालाल लोधी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।