Monday, September 28, 2026
Homeदेशइंसानियत ही एकमात्र ऐसी पूँजी है, जो मृत्यु के बाद भी जीवित...

इंसानियत ही एकमात्र ऐसी पूँजी है, जो मृत्यु के बाद भी जीवित रहती है, लेकिन फिर भी इंसान जीवन को नफरत, अहंकार, ईर्ष्या और अत्यधिक लालच में कर रहा है बर्बाद

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
यह संसार एक रैनबसेरा है, जहाँ हम सब कुछ समय के मुसाफिर बनकर आए हैं। जिस तरह एक किराए के मकान पर हमारा कोई स्थायी अधिकार नहीं होता और तय समय पूरा होने पर उसे खाली करना ही पड़ता है, ठीक वैसे ही यह शरीर और यह सांसें भी हमें एक निश्चित समय के लिए उधार मिली हैं। मौत उस मकान की अंतिम तारीख है, जब हमें इस जीवन की चाबी मालिक को सौंपनी ही होगी, परंतु इस अस्थाई जीवन में आकर इंसान अक्सर भौतिक सुख-साधनों, धन-दौलत, लालच और झूठे अहंकार के जाल में इस कदर फंस जाता है कि वह खुद को अमर समझने लगता है। वस्तुओं और रिश्तों के प्रति अत्यधिक मोह ही हमारे दुखों और मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण बनता है।
हम भूल जाते हैं कि सिकंदर जैसा महान विजेता भी इस दुनिया से खाली हाथ ही गया था। जब जाना तय है, तो इस माटी की काया और भौतिक वस्तुओं से इतना गहरा मोह क्यों? इस जीवन की सार्थकता मोह में नहीं, बल्कि इंसानियत और निस्वार्थ प्रेम में है। जब हम इस दुनिया से विदा होंगे, तो हमारे बंगले, गाड़ियां या बैंक बैलेंस हमारे साथ नहीं जाएंगे। हमारे पीछे केवल वही यादें रह जाएंगी जो हमने दूसरों के दिलों में बोई हैं। किसी रोते हुए को हंसाना, भूखे को रोटी देना और हर जीव के प्रति दया भाव रखना ही सच्ची इंसानियत है। इसलिए, आइए इस किराए के मकान में रहते हुए नफरत और ईर्ष्या के जाले ना बुनें। मोह के बंधनों को थोड़ा ढीला करें और अपने भीतर इंसानियत के दीये को प्रज्वलित रखें। जीवन छोटा है, इसे खूबसूरत कर्मों और आत्मीयता से महकाएं ताकि जब चाबी लौटाने का वक्त आए तो हमारे चेहरे पर कोई पछतावा नहीं, बल्कि एक सुकून भरी मुस्कान हो।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments