मूकनायक समाचार । सूरत
सूरत के नासीरनगर डिमोलिशन को लेकर कई सवाल खडे होने के बाद आखिरकार सूरत महानगरपालिका को कार्रवाई करनी पडी है। हाईकोर्ट के दरवाजे खटखटाने के बाद आखिर सूरत महानगरपालिका की नींद हराम हो गई है। नासीर नगर डिमोलिशन के मामले में जांच समिति के अहवाल के बाद दो कार्यपालक अभियंता समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है। ऐसे में चर्चा के साथ सवाल उठ रहे हैं कि केवल पांच अधिकारियों को सस्पेन्ड करने से समग्र घटना की जिम्मेदारी पूर्ण हो जाएगी या इस विवाद के पडघम उच्च अधिकारी, राजकारणीयों व अन्य विभागों के अधिकारियों तक पहुंचेगी।
30 मई, 2026 को सूरत मनपा के सेन्ट्रल जोन क्षेत्र में आने वाले नासीरनगर में डिमोलिशन की कार्रवाई में अब विवाद गहरा हो गया है। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद पालिका ने जांच समिति की रचना की। समिति ने पेश किए अहवाल में सामने आए मुद्दे के आधार पर अब जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित कर ने के साथ विभागिय जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान किसी भी प्रकार का प्रभाव न पडे और निष्पक्ष जांच हो इसके लिए पालिका ने पांच अभियंतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर देने का फैसला किया। पालिका ने निलंबित किए अधिकारियों में कार्यपालक अभियंता सुजलकुमार धरमशीभाई प्रजापति, कार्यपालक अभियंता जयांग रजनीकांत जीवनरामजीवाला, डिप्टी अभियंता अर्पण मनसुखलाल परमार, आसिस्टन्ट अभियंता मोनिक बाबुभाई गढिया और जुनियर अभियंता नरेशकुमार बीनलभाई गल्चर समाविष्ट है।
जोनल ओफिसर के अनुसार डिमोलिशन के दौरान उपस्थित कार्यपालक अभियंता जयांग जीवनरामजीवाला की भूमिका जांच के केन्द्र में है। दूसरी ओर रोड विभाग के कार्यपालक अभियंता सुजल प्रजापति की इस डिमोलिशन के कार्य में सीधी जिम्मेदारी नहीं होने के बावजूद वह स्थल पर उपस्थित रहे थे, उनकी उपस्थिति और भूमिका को लेकर भी जांच में गंभीर सवाल खडे हुए होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही आसिस्टन्ट अभियंता, डिप्टी अभियंता और जुनियर अभियंता का कार्य भी जांच के दायरे में है। दो कार्यपालक अभियंता क्लास-वन अधिकारी होने से उनके निलंबित के लिए म्युनिसिपल आयुक्त स्थायी समिति के सामने जानकारी के लिए दरखास्त रखी है, इसके बाद सामान्य सभा की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा। नासीर नगर डिमोलिशन में केवल पालिका का कार्य ही नहीं किन्तु राजकारणीयों की भी संभवित दखलगीरी और पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खडे हुए है। अब पांच अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई होने से चर्चा है कि जांच केवल अधिकारियों तक ही सीमित रहेगी या समग्र घटना में जिसके सामने आरोप लगे है वह सभी की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी ऐसी चर्चा उठी है।

