Tuesday, September 29, 2026
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गुरु-शिष्य पर वार, तो समझो सत्ता लाचार

जंतर-मंतर चिल्लाया, 20 जुलाई याद रखना,
शिक्षक और छात्रों पर, जो जुल्म हुआ याद रखना।

एक तरफ गुरु खड़ा था, हाथ में बस कलम थी,
दूसरी तरफ शिष्य खड़े, आँखों में अगन थी।
ना कोई नारा था हिंसा का, ना कोई हथियार था,
बस शिक्षा और रोजगार का, एक छोटा सा सवाल था।

पर जाहिल सत्ता को सवालों से डर लगता है,
उजाले से अंधेरे को हमेशा डर लगता है।
गुरु को घसीटा गया, शिष्य को पीटा गया,
लोकतंत्र की सड़क पर, लोकतंत्र ही लूटा गया।

सोचते हो लाठी से गुरु का मान झुका दोगे?
छात्रों की आवाज को डंडे से दबा दोगे?
याद रखो, गुरु-शिष्य जब एक साथ आते हैं,
तो बड़े-बड़े तख्तो-ताज पल में ढह जाते हैं।

अब बहुत हुआ, अब और नहीं सहना होगा,
जाहिल को अब जाना होगा, जनता को सबक सिखाना होगा।

लेखक- आशाराम मीणा
उप प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, कोटा

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