मूकनायक / रिपोर्टर धर्मवीर गौतम / हिंडौन सिटी
कहीं स्पष्ट बहुमत तो कहीं निर्दलीय पार्षदों के हाथ में सत्ता की चाबी, 21 सितंबर को होगा अध्यक्ष-सभापति का चुनाव
करौली। करौली जिले की नगर परिषद और नगर पालिकाओं में अध्यक्ष एवं सभापति पद के चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले के विभिन्न निकायों में अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशियों की तस्वीर सामने आने के बाद अब पार्षदों के समर्थन और राजनीतिक समीकरणों पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। खास बात यह है कि अलग-अलग निकायों में चुनावी गणित एक जैसा नहीं है। कहीं भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है तो कहीं कांग्रेस बहुमत के करीब है। वहीं कुछ निकायों में निर्दलीय पार्षदों की संख्या इतनी अधिक है कि उनका रुख अध्यक्ष पद का फैसला प्रभावित कर सकता है।
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से अध्यक्ष एवं सभापति पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी। मतदान के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके बाद 22 सितंबर को उपाध्यक्ष एवं उपसभापति पद के चुनाव होंगे।
करौली नगर परिषद में आमने-सामने मुकाबला
करौली नगर परिषद में कुल 55 वार्ड हैं। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस के 28, भाजपा के 11, निर्दलीय 15 और बसपा का एक पार्षद है। यहां बहुमत का आंकड़ा 28 है।
सभापति पद को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या बल मौजूद होने के बावजूद चुनावी गतिविधियों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। 15 निर्दलीय पार्षद भी पूरे समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि कांग्रेस अपने पार्षदों को एकजुट रखने में कितनी सफल रहती है और भाजपा निर्दलीय अथवा अन्य पार्षदों के बीच कितना समर्थन जुटा पाती है।
सपोटरा में भाजपा के पास मजबूत संख्या बल
सपोटरा नगर पालिका के 20 वार्डों में भाजपा के 15, कांग्रेस के 3 और निर्दलीय 2 पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 11 है। ऐसे में भाजपा के पास बहुमत से चार अधिक पार्षद हैं।
अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की ओर से सपना बैरवा और कांग्रेस की ओर से कविता महावर के नाम सामने आए हैं। यहां चुनावी मुकाबले के साथ-साथ यह भी देखने वाली बात होगी कि नए बोर्ड की प्राथमिकताएं क्या रहती हैं और अध्यक्ष पद पर चुने जाने वाला उम्मीदवार शहर की मूलभूत समस्याओं को लेकर क्या रोडमैप रखता है।
मंडरायल में एक पार्षद का समर्थन बदल सकता है समीकरण
मंडरायल नगर पालिका में कुल 20 वार्ड हैं। यहां कांग्रेस के 10, भाजपा के 8 और निर्दलीय 2 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 11 पार्षदों की आवश्यकता है।
अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की शकुंतला धोबी और कांग्रेस की तुलसा जाटव के बीच मुकाबला बताया जा रहा है। कांग्रेस बहुमत से महज एक कदम दूर है, ऐसे में दोनों निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
मंडरायल में चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यही है कि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए किस दल को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलता है।
सुरौठ में निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी
सुरौठ नगर पालिका में चुनावी तस्वीर सबसे अलग नजर आ रही है। 20 वार्डों वाली इस नगर पालिका में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 16 निर्दलीय, भाजपा के 2 और कांग्रेस के 2 पार्षद हैं।
ऐसे में किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच मुकाबला बताया जा रहा है, लेकिन अंतिम राजनीतिक स्थिति निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी अधिकृत सूची से सत्यापित किया जाना महत्वपूर्ण रहेगा।
सुरौठ में 16 निर्दलीय पार्षदों का रुख सबसे अहम माना जा रहा है। ऐसे में यहां अध्यक्ष पद का चुनाव दलों से अधिक पार्षदों के आपसी समीकरण और समर्थन पर निर्भर दिखाई दे रहा है।
टोडाभीम में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
टोडाभीम नगर पालिका में कुल 35 वार्ड हैं। यहां कांग्रेस के 14, निर्दलीय 15 और भाजपा के 6 पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा 18 है।
अध्यक्ष पद के लिए संगीता, ज्योति और ललिता के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर सामने आई है। किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं होने के कारण यहां भी निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
15 निर्दलीय पार्षदों का रुख अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्णायक महत्व रख सकता है। चुनाव से पहले राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की ओर से समर्थन जुटाने की कोशिशें भी चर्चा में हैं।
हिण्डौन में सभापति निर्विरोध, अब उपसभापति पर नजर
वहीं हिण्डौन सिटी नगर परिषद में सभापति पद की तस्वीर पहले ही साफ हो चुकी है। भाजपा की विजय कुमारी निर्विरोध सभापति चुनी जा चुकी हैं। अब नगर परिषद में उपसभापति पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
22 सितंबर को होने वाले उपसभापति चुनाव में कौन मैदान में उतरता है और किसे पार्षदों का समर्थन मिलता है, इस पर शहर की नजर रहेगी।
पांच निकायों में अलग-अलग राजनीतिक गणित
करौली जिले के निकाय चुनावों में इस बार अलग-अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। करौली में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े पर है, सपोटरा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, मंडरायल में कांग्रेस बहुमत से एक कदम दूर है, जबकि सुरौठ और टोडाभीम में निर्दलीय पार्षदों की संख्या चुनावी समीकरण को खासा प्रभावित कर सकती है।
अब 21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष और सभापति पद के चुनाव में यह स्पष्ट होगा कि पार्षदों का संख्या बल किसके पक्ष में जाता है और किन निकायों में अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदलते हैं।

