अंशु जर्नलिस्ट
निठारी कांड का बरी आरोपी सुरेंद्र कोली हरिद्वार में मृत मिला दुकान में फंदे से लटका मिला शवमुख्य बातें पहचान छिपाकर रह रहा था जेल से रिहा होने के बाद ‘सदाराम’ नाम के फर्जी वोटर आईडी कार्ड के सहारे हरिद्वार में काट रहा था जिंदगी।
चार दिन पहले खोली थी दुकान
आर्थिक तंगी से उबरने के लिए ६ सितंबर को शुरू की थी चाय की दुकान, मौके से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
पीड़ितों को साजिश का शक:
निठारी कांड के पीड़ित परिवारों ने उठाए मौत पर सवाल: कहा- ‘राज दफन करने के लिए हुई हत्या’।
नोएडा। वर्ष २००६ के देश के सबसे खौफनाक और बहुचर्चित नोएडा के निठारी हत्याकांड मामले में पिछले साल सुप्रीम कोर्ट से बरी हो चुका सुरेंद्र कोली (५४) उत्तराखंड के हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया है। शुक्रवार (१८ सितंबर २०२६) की सुबह भूपतवाला (सप्तऋषि क्षेत्र) में लाल माता मंदिर के सामने स्थित एक चाय के खोखे (दुकान) के भीतर उसका शव फंदे से लटका हुआ मिला। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर डॉक्टरों के विशेष पैनल के तहत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ‘सदाराम’ बनकर छिपा रहा था अतीतहरिद्वार पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि करीब १९ साल जेल में बिताने और नवंबर २०२५ में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद सुरेंद्र कोली अपनी पहचान छिपाकर हरिद्वार में रह रहा था। समाज के डर और निठारी कांड के कलंक से बचने के लिए उसने ‘सदाराम’ नाम का एक पुराना फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनवा रखा था। इसी नाम के सहारे उसने पूर्व में सिडकुल की एक निजी कंपनी में सुरक्षाकर्मी (सिक्योरिटी गार्ड) के रूप में भी नौकरी की थी। बेटी के जन्मदिन और किराए को लेकर था तनाव मेंस्थानीय दुकानदारों और जांच अधिकारियों के अनुसार, कोली गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। एक सामाजिक कार्यकर्ता की मदद से उसने ६ सितंबर को ही चाय का यह खोखा किराए पर लिया था। पड़ोसियों ने बताया कि दुकान खोलते समय वह बेहद सामान्य दिख रहा था और उसने मिठाई भी बांटी थी। हालांकि, पिछले दो-तीन दिनों से वह दुकान के किराए और अपनी बेटी के जन्मदिन के लिए पैसों का इंतजाम न कर पाने के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव में था। शुक्रवार सुबह जब काफी देर तक दुकान का शटर नहीं खुला, तो मकान मालिक और स्थानीय लोगों ने खिड़की से झांककर देखा, जहां उसका शव लटका हुआ था।मासूमों के परिवारों ने कहा- ‘यह आत्महत्या नहीं, हत्या है ‘सुरेंद्र कोली की मौत की खबर फैलते ही नोएडा के निठारी गांव के पीड़ित परिवारों में एक बार फिर आक्रोश और संदेह का माहौल है। निठारी कांड में अपनी १० वर्षीय बेटी को खोने वाले झब्बू लाल और सुनीता ने इस मौत को सोची-समझी साजिश करार दिया है। पीड़ितों का आरोप है कि कोली मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के भीतर हुए कई बड़े और रसूखदार लोगों के काले कारनामों का चश्मदीद गवाह था। वह कई ऐसे राज जानता था जो सामने नहीं आ पाए थे। पीड़ित परिवारों का दावा है कि कोली के बरी होने के बाद उन राज़ों के खुलने का डर था, इसलिए उसकी आवाज को हमेशा के लिए दबा दिया गया है। पुलिस कर रही है हर पहलू की जांचहरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक (FSL) टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया “प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है लेकिन बिना सुसाइड नोट के किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हम आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और साजिश के आरोपों समेत सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रहे हैं।” पुलिस ने अल्मोड़ा में रह रहे कोली के परिवार और उसके भाई हरीश को घटना की सूचना दे दी है।

