Tuesday, September 29, 2026
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कांग्रेस की कलह, भाजपा की रणनीति और विजय कुमारी की निर्विरोध ताजपोशी

हिण्डौन नगर परिषद की सभापति होंगी विजय कुमारी

मूकनायक / रिपोर्टर धर्मवीर गौतम / हिण्डौन सिटी

हिण्डौन सिटी। नगर निकाय चुनाव के बाद हिण्डौन नगर परिषद की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल अब खत्म हो गया है। भाजपा की विजय कुमारी नगर परिषद की नई सभापति होंगी। सभापति पद के लिए विजय कुमारी के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशी फुलवा देवी ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन नामांकन वापस लिए जाने के बाद विजय कुमारी के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।

सभापति पद का यह चुनाव हिण्डौन की स्थानीय राजनीति में कई मायनों में अहम रहा। चुनावी मैदान में जहां भाजपा ने संगठनात्मक एकजुटता और रणनीतिक सक्रियता दिखाई, वहीं कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण और चुनावी रणनीति को लेकर सामने आए मतभेद चर्चा में रहे।

भाजपा ने संगठन को बनाया ताकत

हिण्डौन नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड बनाने के बाद सभापति पद पर विजय कुमारी का निर्विरोध निर्वाचन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।

नगर परिषद चुनाव प्रभारी राम अवतार मीणा, पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव, हिण्डौन मंडल अध्यक्ष बबली चतुर्वेदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं ने चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी संगठन और स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल के चलते भाजपा अपने पक्ष में समीकरण बनाने में सफल रही।

कांग्रेस में टिकट वितरण से लेकर बोर्ड तक उठे सवाल

वहीं कांग्रेस के लिए नगर निकाय चुनाव के दौरान टिकट वितरण और संगठनात्मक रणनीति को लेकर कई सवाल उठे। कांग्रेस के हिण्डौन नगर अध्यक्ष एजाज अहमद और विधायक अनीता जाटव के बीच चुनावी परिणामों और पार्टी की स्थिति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए।

नगर अध्यक्ष एजाज अहमद का कहना रहा कि हिण्डौन में कांग्रेस की स्थिति लंबे समय से मजबूत रही है, लेकिन टिकट वितरण में स्पष्टता नहीं होने से पार्टी को नुकसान हुआ।

दूसरी ओर विधायक अनीता जाटव की ओर से बोर्ड नहीं बनने के लिए एजाज अहमद की भूमिका को जिम्मेदार बताया गया। वहीं टिकट वितरण के दौरान कांग्रेस का बोर्ड बनाने को लेकर विधायक की ओर से किए गए लिखित दावे की भी अब राजनीतिक चर्चाओं में चर्चा हो रही है।

एक तरफ मतभेद, दूसरी तरफ एकजुटता

हिण्डौन नगर परिषद के चुनाव परिणामों ने स्थानीय राजनीति की दो तस्वीरें सामने रखीं। कांग्रेस में जहां चुनावी रणनीति और जिम्मेदारी को लेकर मतभेद सार्वजनिक हुए, वहीं भाजपा ने अपने संगठन और स्थानीय नेताओं को एक मंच पर रखते हुए सभापति पद तक अपनी स्थिति मजबूत की।

फुलवा देवी के नामांकन वापस लेने के बाद विजय कुमारी के निर्विरोध निर्वाचन ने भाजपा के बोर्ड पर अंतिम मुहर लगा दी।

अब निगाहें नई सभापति विजय कुमारी और भाजपा बोर्ड के आगामी कार्यकाल पर हैं। शहर की सड़क, सफाई, पेयजल, विकास कार्यों और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर जनता की अपेक्षाएं नई परिषद से जुड़ी हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा का नया बोर्ड इन अपेक्षाओं को किस तरह पूरा करता है।

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