Monday, September 28, 2026
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घर के कलह को घर की चौखट के भीतर ही सुलझा लेना बुद्धिमानी है, उसे चौराहे पर लाना है मूर्खता

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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‘घर’ केवल ईंट-पत्थरों से बना ढांचा ही नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और गोपनीयता की बुनियाद पर टिका एक पवित्र स्थान है। किसी भी परिवार में विचारों का मतभेद या छोटी-मोटी कलह होना स्वाभाविक है। किंतु, एक समझदार परिवार वही है जो अपनी इस कलह को घर की चौखट के भीतर ही सुलझा ले। जब घर की बातें घर के अंदर रहती हैं, तो सदस्यों के बीच आपसी संवाद और समझौते की गुंजाइश बनी रहती है। लोग अपनों के सामने खुलकर अपनी गलती मान सकते हैं। इसके विपरीत, जब घर के झगड़ों को चौराहे पर लाया जाता है अर्थात बाहरी लोगों, पड़ोसियों या रिश्तेदारों के सामने तमाशा बनाया जाता है तो स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ जाती है। बाहरी लोग अक्सर सहानुभूति दिखाने का नाटक तो करते हैं, लेकिन पीठ पीछे मजाक भी उड़ाते हैं।
चौखट से बाहर जाते ही लोग बात का बतंगड़ बना देते हैं और ऐसे लोग अक्सर आग में घी डालने का काम करते हैं, जिससे छोटी सी बात भी बड़ा रूप ले लेती है। इससे ना केवल परिवार की प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है, बल्कि आपसी रिश्तों में आई दरार हमेशा के लिए स्थायी हो जाती है। बाहरी हस्तक्षेप से रिश्तों की कड़वाहट और गहरी हो जाती है। अंततः, घर की समस्याओं को आपस में बैठकर, शांति और धैर्य से सुलझाना ही सच्ची बुद्धिमानी है। अपनों के बीच की दीवार को संवाद से गिराना चाहिए, ना कि दुनिया के सामने ढोल पीटकर। परिवार की गरिमा बनाए रखने में ही हर सदस्य की भलाई है क्योंकि घर की शांति और मर्यादा बनाए रखने के लिए धैर्य और गोपनीयता सबसे बड़े हथियार हैं।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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