40–50 गांवों में फसल संकट, सूखे नाले-तालाब बढ़ा रहे चिंता; किसानों ने मांगा तत्काल सर्वे और ऋण राहत
मूकनायक/ पीपलराव विष्णु शिंदे
देवास/ मध्य प्रदेश
पीपलरावां। क्षेत्र में इस बार अल्प वर्षा किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से 40 से 50 गांवों के नाले-तालाब सूखे पड़े हैं और खेतों में किसानों की उम्मीद कही जाने वाली सोयाबीन की फसल भी संकट में है। किसानों का दावा है कि पीला मोजेक रोग और बारिश की कमी से सोयाबीन की फसल मुरझाकर अधपकी अवस्था में पहुंच गई है।
खेतों में सूख रही उम्मीद, सिर पर चढ़ रहा कर्ज
क्षेत्र के अधिकांश किसान खरीफ सीजन में सोयाबीन की फसल पर निर्भर रहते हैं। खेती की लागत से लेकर सहकारी संस्थाओं और अन्य माध्यमों से लिए गए ऋण की अदायगी तक किसानों की उम्मीद इसी फसल से जुड़ी है। ऐसे में फसल खराब होने की स्थिति ने किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
किसानों का कहना है कि यदि अब भी पर्याप्त बारिश हो जाती है तो अधूरी फसल से कुछ उत्पादन की उम्मीद बच सकती है, लेकिन बारिश नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ना तय है।
किसानों की दो टूक—पहले सर्वे हो, फिर मिले राहत
प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से पूरे क्षेत्र में तत्काल फसल अनावरी एवं नुकसान का सर्वे करवाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेतों की वास्तविक स्थिति मौके पर देखकर दर्ज की जाए, ताकि पात्र किसानों को शासन की राहत योजनाओं का लाभ मिल सके।
वहीं कुछ किसानों ने सेवा सहकारी संस्थाओं से लिए गए कृषि ऋण में राहत अथवा ऋण माफी की मांग भी उठाई है। किसानों का कहना है कि जब फसल ही हाथ में नहीं आएगी तो ऋण की अदायगी कैसे होगी? समय पर ऋण नहीं चुका पाने पर डिफाल्टर घोषित होने का डर भी किसानों को सता रहा है।
अब देखना यह है कि किसानों की इस परेशानी पर शासन-प्रशासन कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या खेतों तक पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर राहत की ठोस पहल करता है।
किसानों की मांग: तत्काल सर्वे • फसल नुकसान का आकलन • राहत राशि • कृषि ऋण में राहत

