छात्रों को केवल डिग्री नहीं, कौशल्य, अनुभव व परिवर्तित समय के अनुसार मार्गदर्शन मिलना जरूरी
मूकनायक / गुजरात /सूरत
By Jayanti M. Solanki
छह साल में एनईपी ने शिक्षा बदल दी है, अब परिवर्तन का फायदा छात्रों को भविष्य में मिलना जरूरी है। छात्रों को केवल डिग्री नहीं किन्तु कौशल्य, प्रायोगिक अनुभव और परिवर्तित समय के साध कदम मिलाने की क्षमता प्राप्त हो ऐसी शिक्षा मिले इस पर वजन देते हुए वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी में नेशनल एजुकेशन पोलिसी-2020 का असरकारक इम्प्लीमेन्टेशन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में डो. सागर दवे विशेष फर्ज में रत अधिकारी (एनईपी), केसीजी, शिक्षा विभाग, गुजरात सरकार ने नई शिक्षा नीति लागु करने की सफर, परिवर्तित होने वाली शिक्षा पद्धति और उच्च शिक्षा के लिए जरूरी परिवर्तन के लिए मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में कुलपति डो. किशोरसिंह चावडा वर्च्युअल माध्यम से जुडे, जबकि कुलसचिव डो. रमेशदान गढवी ने प्रासंगिक प्रवचन दिया। डो. किशोरसिंह ने कहा कि छात्रों को केन्द्र में रखकर शिक्षा देना तथा परिवर्तित समय अनुसार शिक्षा पद्धति में जरूरी बदलाव लाना जरूरी है।
कुलसचिव डो. रमेशदान गढवी ने एनईपी को लागु करने की प्रक्रिया को आगे बढने की प्रक्रिया दर्शाया, उन्होंने कहा कि नीति को लागु करने से समय पर मार्गदर्शिकाओं और नियमों में होने वाला बदलाव शिक्षा क्षेत्र की जरूरत के साथ जुडे हुए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में आगामी स्तर पर उद्योग के साथ जुडाव और संशोधन अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया और एनईपी को लागु करना शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होने की जानकारी दी।
डो. सागर दवे ने बताया कि 29 जुलाई, 2020 को एनईपी-2020 घोषित की गई है और तब से उच्च शिक्षा क्षेत्र में निरंतर मार्गदर्शिकाओ और नियमों में परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनईपी का मूल उद्देश्य गुणवत्तायुक्त शिक्षा है। केवल नीति नियमों को लागु करने से यह काम पूर्ण नहीं हो सकता, छात्रों को खास कर गुणवत्तायुक्त शिक्षा और योग्य परिणाम मिलना काफी महत्व का है। छात्रों केवल जानकारी याद रखने की बजाय प्राप्त किया हुआ ज्ञान का उपयोग कर सके और खुद के भविष्य के लिए जरूरी क्षमताओं का विकास कर सके उस दिशा में शिक्षा आगे बढनी चाहिए ऐसा उन्होंने कहा। चार साल के अन्डर ग्रेज्युएट अध्ययन के लिए डो. दवे ने कहा कि चौथा साल केवल एक वर्ष अधिक अध्ययन करने की बाबत नहीं है। उसमें छात्रों को ओनर्स, रिसर्च, इन्टर्नशिप और इन्डस्ट्री एक्सपोजर जैसे अवसरों के साथ जुडने का प्रयास है। एनईपी छात्र केन्द्रित होने से छात्रों के अध्ययन और भविष्य को ध्यान में रखकर उन्हें योग्य विकल्प और अवसर मिलना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी में चार साल के युजी के बाद मास्टर्स में प्रवेश, सहायक प्राध्यापक की लायकात, एमबीए में प्रवेश, विषय बदलने का अवसर, बी.एड. की रचना, ग्रान्ट-इन-एइड कोलेजों में चौथा साल का वर्कलोड तथा एआईसीटीई की मंजूरी समेत के विभिन्न मुद्दों पर डो. सागर दवे ने मार्गदर्शन दिया। डो. दवे ने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी के छात्र केन्द्रित अभिगम की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि एनईपी को लागु केवल नियमों और मार्गदर्शिकाओं तक मर्यादित नहीं रखकर किन्तु उनके परिणाम में छात्रों की शिक्षा, कौशल्य, विचारशक्ति और भविष्य के अवसरो में वास्तविक परिवर्तन आना अति जरूरी है।

