मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इतिहास इस बात का गवाह है कि जिसने भी परिवर्तन के इस नियम को ठुकराया, वह समय की धारा में कहीं पीछे छूट गया। जिस तरह मौसम बदलते हैं और पेड़-पौधे नई पत्तियों को धारण करने के लिए पुरानी पत्तियों को गिरा देते हैं, ठीक उसी तरह इंसान को भी आगे बढ़ने के लिए पुरानी सोच, तकनीकों और आदतों को छोड़ना पड़ता है। जो रुक जाता है या बदलने से इंकार कर देता है, वह अपनी प्रगति के सारे रास्ते बंद कर लेता है। परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, खुद को उनके अनुसार ढाल लेना ही सफलता की पहली सीढ़ी है। आज का दौर, तकनीक और ज्ञान के विस्फोट का दौर है। जो हुनर या विचार कल तक प्रासंगिक थे, जरूरी नहीं कि वे आज या आने वाले कल में भी उतने ही उपयोगी रहें ।
आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्रांति के इस दौर में नए स्किल्स सीखना अनिवार्य हो गया है और भविष्य में केवल वही टिक पाएंगे जो ना केवल नया सीखने के लिए तैयार हैं, बल्कि जो पुराना और अप्रासंगिक हो चुका है उसे भूलने और दोबारा नया सीखने की हिम्मत रखते हैं । भविष्य किसी बंद दरवाजे की तरह नहीं है, बल्कि यह एक खुला आसमान है—लेकिन यह उनके लिए ही है, जो अपने पंखों को हवा के रुख के हिसाब से मोड़ना जानते हैं। चुनौतियों को देखकर डरने के बजाय खुद में बदलाव लाना ही बुद्धिमत्ता है। जो आज खुद को नया रूप देने का साहस रखते हैं, कल की सफलता और आने वाला हर सवेरा उन्हीं का होगा।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

