मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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ज्ञान, श्रेष्ठ विचार और उत्तम आचरण—ये तीन तत्व मानव जीवन के सच्चे आभूषण और वास्तविक रत्न हैं। भौतिक संपदा क्षणभंगुर होती है, किंतु ये नैतिक मूल्य व्यक्ति के चरित्र को अमर और अनुकरणीय बनाते हैं। ज्ञान मनुष्य के भीतर का अंधकार मिटाकर विवेक का दीप जलाता है। यह सत्य और असत्य में अंतर करने की क्षमता प्रदान करता है। जब ज्ञान प्राप्त होता है, तब मन में श्रेष्ठ विचारों का जन्म होता है। विचार ही मनुष्य के कर्मों का आधार होते हैं, सात्विक और उच्च विचार समाज में भ्रातृत्व, करुणा और न्याय की नींव रखते हैं,किंतु ज्ञान और विचारों की सार्थकता तब तक सिद्ध नहीं होती, जब तक वे उत्तम आचरण में ना ढलें।
ज्ञान और विचार मिलकर जब मनुष्य के व्यवहार में झलकते हैं तो वह समाज के लिए एक आदर्श बन जाता है।
ये तीनों तत्व केवल व्यक्ति का कल्याण ही नहीं करते, बल्कि संपूर्ण समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। जिस समाज में ज्ञानी, विचारशील और चरित्रवान नागरिक होते हैं, वह समाज, कुरीतियों और पतन से मुक्त होकर उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है। इसलिए भौतिक धन के पीछे भागने के बजाय ज्ञान, विचार और आचरण के रत्नों को अपनाना ही जीवन की वास्तविक सफलता है। यही वे स्तंभ हैं, जो मानव सभ्यता को महान और दिशा-संपन्न बनाते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

