Tuesday, September 29, 2026
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विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अधिकारों, अस्मिता और संस्कृति की रक्षा का संकल्प

मूकनायक/नरेश कुमार जाटव/ कैलादेवी/करौली/राजस्थान।

करौली। मीणा आदिवासी समुदाय की सर्वोच्च हथाई दानालपुर हिंगोट श्री महावीर जी में “विश्व आदिवासी दिवस” आदिवासी मीणा पंच पटेल महा पंचायत के प्रदेश अध्यक्ष पृथ्वीराज बगलाई के मुख्य आथित्य एवं करौली जिला अध्यक्ष हीरालाल नगला मीना की अध्यक्षता में मनाया गया।
इस अवसर पर आदिवासी मीणा पंच पटेल महापंचायत राजस्थान के प्रदेश प्रवक्ता रूपसिंह गोरेहार ने प्रदेश एवं देश के समस्त आदिवासी समुदाय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय की पहचान, संस्कृति, परंपराओं, संवैधानिक अधिकारों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लेने का दिन है।
पांचू पटेल हिंगोट ने कहा कि आदिवासी समुदाय की पहचान प्रकृति, संस्कृति, सामूहिकता और स्वाभिमान से जुड़ी हुई है।
रामहंस सेवानिवृत अध्यापक गावड़ी ने अपनी रोचक कविताओं के माध्यम से बताया कि सदियों से आदिवासी समुदाय ने जल, जंगल और जमीन का संरक्षण करते हुए प्रकृति के साथ संतुलित जीवन पद्धति को अपनाया है। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली परंपराओं और मूल पहचान से जुड़े तथा आधुनिक शिक्षा एवं तकनीक के साथ आगे बढ़े।
जिला अध्यक्ष हीरालाल नगला मीना ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता
नशाखोरी, अंधविश्वास, सामाजिक भेदभाव एवं अन्य कुरीतियों को दूर करने के लिए समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
संगठन और एकता
समुदाय के सभी वर्गों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर शिक्षा, अधिकार और विकास के मुद्दों पर एकजुट होना चाहिए।
रूपसिंह गोरेहार ने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि आदिवासी समुदाय अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं को समझते हुए आधुनिक शिक्षा एवं वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़े।
उन्होंने कहा—“वजूद एवं अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासियत की ओर लौटना ही होगा।”
आदिवासियत का अर्थ केवल अपनी परंपराओं को याद करना नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता, स्वाभिमान, न्याय, समानता और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता को जीवन का हिस्सा बनाना है।
उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस पर संपूर्ण आदिवासी समुदाय से आह्वान किया कि शिक्षित बनें, संगठित रहें, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं पहचान से जोड़ें।
समारोह में रामावतार कुंजेला, धर्मसिंह रानौली,रामकिशोर नगला, रामचरण पहाड़ी, रतन पटेल इरनिया, विश्राम मोहनपुरा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
समारोह में खुशीराम नयागांव, ऋषि अध्यापक नगला मोहरसिंह दनालपुर, पटवारीलाल भौटवाड़ा,रामहंस ,सुखाराम मेहस्वा, अमृतलाल पहाड़ी, रामराज जगदीश दनालपुर, किरोड़ी खंडीप, प्रेमसिंह सिंघनिया, साथ क्षेत्र के पंच पटेल एवं युवा साथी उपस्थित रहे।

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