मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में जब भी हम कोई नया लक्ष्य तय करते हैं, तो दो रास्ते हमारे सामने होते हैं—प्रयास करके सफल या असफल होना या फिर संशय के डर से प्रयास ही ना करना। नाकामी या असफलता वास्तव में किसी यात्रा का अंत नहीं होती। यह एक अनुभव है, जो हमें हमारी गलतियों का अहसास कराती है और अगली बार अधिक समझदारी से प्रयास करने का अवसर देती है। दुनिया के महानतम आविष्कारक, वैज्ञानिक और उद्यमी अपनी अनगिनत असफलताओं के बाद ही सफलता के शिखर तक पहुँचे हैं। असफलता हमें सिखाती है, जबकि संदेह हमें बढ़ने से ही रोक देता है। संदेह एक ऐसा दीमक है जो व्यक्ति की क्षमताओं, उसके आत्मविश्वास और उसके साहस को भीतर ही भीतर खोखला कर देता है।
जब इंसान अपनी योग्यता पर संदेह करने लगता है, तो वह प्रयास करने से पहले ही हार मान लेता है। यह मन की वह अवस्था है, जहाँ व्यक्ति अपनी ही सोच का बंदी बन जाता है। इस प्रकार, जो सपना किसी कठिन चुनौती से हारकर टूट सकता था, वह शुरू होने से पहले ही संदेह की बलि चढ़ जाता है। सपनों को साकार करने के लिए सबसे पहली शर्त है—स्वयं पर विश्वास। यदि आपके भीतर आत्मविश्वास का दीया जल रहा है तो कोई भी असफलता आपका रास्ता नहीं रोक सकती । इसलिए असफल होने के डर को छोड़ें और अपने संदेहों को खुद पर हावी ना होने दें। असफलता से मिली सीख आपको मंजिल तक पहुँचा सकती है, लेकिन संदेह केवल अफसोस की ओर ले जाता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

