Thursday, July 16, 2026
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छात्रों के आंदोलन को मिला चंद्रशेखर आज़ाद का साथ, जंतर-मंतर पर गूंजीं न्याय की मांगें

मूकनायक/ दुर्गेन्द्र सम्राट उप संपादक जंतर मंतर/ दिल्ली

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर बुधवार को छात्रों और युवाओं के एक बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन का केंद्र बना रहा NEET-UG परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर हजारों छात्र, अभ्यर्थी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने प्रदर्शन किया आंदोलन में भीम आर्मी प्रमुख एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी बुधवार को शामिल हुए उन्होंने धरनास्थल पर पहुंचकर कई दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद सोनम वांगचुक से मुलाकात की उनका हालचाल जाना और छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर छात्रों के हाथों में तिरंगा, संविधान की प्रतियां, डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र और विभिन्न मांगों से जुड़ी तख्तियां दिखाई दीं प्रदर्शनकारी “पेपर लीक बंद करो”, “छात्रों को न्याय दो”, “परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाओ” और “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो” जैसे नारे लगाते रहे छात्रों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोपों ने लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ा है और उनकी वर्षों की मेहनत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य मंच से छात्रों को संबोधित करते हुए सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि देश का भविष्य उसके युवा हैं और यदि शिक्षा व्यवस्था पर से छात्रों का विश्वास उठने लगे तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है और इसे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज में समानता और न्याय का रास्ता तैयार करती है इसलिए परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती।

चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली या पेपर लीक के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए उन्होंने छात्रों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि वे संसद से लेकर सड़क तक छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे।

धरनास्थल पर मौजूद छात्रों और आंदोलन के संयोजकों से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखना बेहद आवश्यक है उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन आंदोलन में किसी भी प्रकार की कमी या बहाना तलाशने की कोशिश कर सकते हैं इसलिए सभी प्रदर्शनकारी अनुशासन बनाए रखें ताकि आंदोलन की नैतिक शक्ति बनी रहे।

प्रदर्शन के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद ने आंदोलन के प्रमुख सहयोगी अभिजीत दीपके से भी बातचीत की उन्होंने कहा आप डटे रहिए। छात्रों के हित में 20 जुलाई का आंदोलन ऐतिहासिक होने वाला है पिछले 10–15 वर्षों में ऐसा बड़ा छात्र आंदोलन देखने को नहीं मिला है यदि यह आंदोलन सफल होता है तो देशभर के युवाओं की आवाज और मजबूत होगी।

उन्होंने घोषणा की कि 20 जुलाई को प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन में वह स्वयं शामिल होंगे और जंतर-मंतर से संसद तक पैदल मार्च करेंगे उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे को संसद में भी पूरी मजबूती से उठाया जाएगा और सरकार को जवाब देना होगा।

धरनास्थल पर पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली बातचीत के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए सोनम वांगचुक से पूछा कि यदि 20 जुलाई का आंदोलन सफल रहता है तो क्या वे अपना अनशन समाप्त करेंगे इस पर सोनम वांगचुक ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाकर सकारात्मक संकेत दिया यह दृश्य वहां मौजूद छात्रों और समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

अपने संबोधन में चंद्रशेखर आज़ाद ने एक और महत्वपूर्ण बात कही उन्होंने कहा “यदि मैं स्वयं यहां भूख हड़ताल पर बैठ गया तो केवल एक जिले या एक प्रदेश के लोग नहीं बल्कि पूरे देश से हजारों-लाखों लोग दिल्ली पहुंच जाएंगे और यहां जगह कम पड़ जाएगी” उनके इस बयान पर उपस्थित छात्रों और समर्थकों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ उनका स्वागत किया।

जंतर-मंतर पर पूरे दिन आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

प्रदर्शन में शामिल विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने मांग की कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, पेपर लीक रोकने के लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाए परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कानून लागू किए जाएं छात्रों का कहना था कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।

आंदोलन को समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन भी मिलता दिखाई दिया कई सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और आम नागरिकों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की वहीं फिल्म और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन और सोनम वांगचुक के अनशन के प्रति समर्थन जताया।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय की मांग को लेकर है उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा तब तक लोकतांत्रिक तरीके से उनका आंदोलन जारी रहेगा।

जंतर-मंतर से सामने आई तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि देश का युवा अब शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर पहले से अधिक मुखर है अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं कि छात्रों की मांगों NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों और आंदोलन से उठे सवालों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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