Friday, July 17, 2026
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मानसून में तेज हुई वन संरक्षण गतिविधियां, जल संरक्षण से हरियाली और वन सुरक्षा को मिल रहा नया बल

बलौदाबाजार वनमंडल में जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुनर्जनन और मानव-वन्यजीव संरक्षण के लिए समन्वित अभियान, जनभागीदारी से मजबूत हो रहा पर्यावरण संरक्षण

मानसून की शुरुआत के साथ छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार वनमंडल में वन संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन से जुड़े कार्यों में तेजी आ गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुनर्जनन, वन महोत्सव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा वन मार्गों के रखरखाव जैसे कार्यों को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा ऋतु का अधिकतम उपयोग करते हुए वन क्षेत्रों को अधिक समृद्ध, सुरक्षित और हराभरा बनाना है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश तथा वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में विभिन्न वन परिक्षेत्रों में संरक्षण संबंधी गतिविधियां निरंतर जारी हैं। विभाग का मानना है कि वृक्षारोपण, प्राकृतिक पुनर्जनन, वनों को आग से बचाने, अवैध कटाई पर रोक, झूम कृषि नियंत्रण तथा जनजागरूकता जैसे प्रयास स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से और अधिक प्रभावी बन रहे हैं।

‘जल संचय से जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ अभियान के अंतर्गत पूर्व वर्षों में निर्मित सॉइल कंजर्वेशन ट्रेंच (एससीटी) एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाएं हाल की बारिश से पूरी तरह भर चुकी हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण तथा वन क्षेत्रों में नमी बनाए रखने में मदद मिल रही है, जिससे पौधों और वन्यजीवों को भी लाभ पहुंच रहा है।

वनमंडल के देवपुर वन परिक्षेत्र में साजा प्रजाति के सीड बॉल से सफल अंकुरण के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वहीं अर्जुनी वन परिक्षेत्र के उत्तर महराजी परिसर में कंटूर पाल और जल संरक्षण संरचनाओं के किनारे सीड बॉल तथा स्थानीय घास प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। इससे मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण के साथ प्राकृतिक रूप से नए पौधों का विकास भी सुनिश्चित होगा।

बारिश के मौसम में वन मार्गों को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्रॉस ड्रेनेज (आड़ीपार) निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। बार-दोंद मार्ग, पुटपुरा तथा पूर्व सुरबाय-बारनवापारा वन मार्ग सहित कई स्थानों पर सुरक्षा श्रमिक वर्षा से होने वाले कटाव को रोकने और मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने में जुटे हुए हैं।

वन महोत्सव के अंतर्गत चलाए जा रहे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भी लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के नंदनिया एवं बल्दाकछार परिसरों में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, वन प्रबंधन समितियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, ग्रामीणों तथा वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

बारनवापारा अभयारण्य में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए हाथी मित्र दल को टॉर्च, मेगाफोन और जूते उपलब्ध कराए गए हैं। इससे दल वन्य हाथियों की प्रभावी निगरानी कर सकेगा तथा ग्रामीणों को समय रहते सूचना देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अलावा बल्दाकछार वन परिक्षेत्र के दलदली परिसर में सुरक्षा संरचनाओं के किनारे लाइव हेज के रूप में कैक्टस का रोपण भी शुरू किया गया है, जिससे मिट्टी संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।

वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि मानसून प्राकृतिक पुनर्जनन और वन संरक्षण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, पौधारोपण, वन मार्गों का रखरखाव, मानव-वन्यजीव संरक्षण तथा जनभागीदारी से जुड़े सभी कार्य समन्वित रूप से किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से वन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी, जैव विविधता तथा जल एवं वन संसाधनों के सतत संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी और प्रदेश में हरित पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।

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