मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिंदगी अनुभवों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है और इस सफर में हमारा सामना अनगिनत लोगों से होता है, जिस तरह होली का त्योहार बिना रंगों के अधूरा है, उसी तरह हमारी जिंदगी भी लोगों के बिना अधूरी है । कुछ लोग हमारी जिंदगी में खुशियों के सुंदर रंग बिखेरने आते हैं, तो कुछ अपनी बदलती फितरत से हमें जीवन का सबसे बड़ा सबक दे जाते हैं । कई बार जिन्हें हम अपना सबसे करीबी समझते हैं, वे वक्त आने पर गिरगिट की तरह रंग बदल लेते हैं । उनका यह बर्ताव शुरुआत में हमें मानसिक ठेस और दुख पहुंचाता है । हालांकि, ऐसे लोगों का रंग बदलना भी जीवन के लिए जरूरी है । वे हमें सिखाते हैं कि हर किसी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए । यह कड़वा अनुभव हमें भविष्य के लिए ज्यादा मजबूत और समझदार बनाता है ।
निःस्वार्थ प्रेम के ऐसे भी सच्चे मित्र, परिवार के सदस्य या शुभचिंतक होते हैं, जो हमारी उदासी को पहचानकर चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं । जब जीवन में दुखों का अंधेरा छा जाता है, तब ये लोग उम्मीद और हौसले का नया रंग भरते हैं. इनके साथ से जिंदगी खूबसूरत, जीवंत और जीने योग्य महसूस होने लगती है । अंततः, जिंदगी की इस ‘होली’ में दोनों ही प्रकार के लोगों का अपना एक खास महत्व है । रंग भरने वाले लोग जहां हमें जीने की वजह और खुशियां देते हैं, वहीं रंग बदलने वाले लोग हमें दुनियादारी की समझ और अनुभव की कसौटी पर परखते हैं. इसलिए, हमें दोनों ही प्रकार के इंसानों का आभारी होना चाहिए क्योंकि इन सब के मिलने से ही हमारे जीवन का यह उत्सव पूरा और संपूर्ण बनता है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

