मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मानव समाज नियमों, नैतिकताओं और मानवीय मूल्यों से संचालित होता है। जहाँ एक ओर समाज की सुरक्षा के लिए बुराई से दूरी बनाना और उसके प्रति सजग रहना अत्यंत आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर यदि कोई व्यक्ति अपनी गलतियों को सुधारने का प्रयास करे, तो उसे एक नया अवसर देना समाज का परम दायित्व बन जाता है। बुराई और अपराध समाज के ताने-बाने को कमजोर करते हैं। इसलिए, खुद को और अपने परिवार को नैतिक पतन से बचाए रखने के लिए सजगता ही पहली शर्त है। बुराई से दूरी बनाए रखना किसी से घृणा करना नहीं, बल्कि स्वयं को नकारात्मकता के प्रभाव से सुरक्षित रखना है।
कोई भी व्यक्ति जन्म से बुरा नहीं होता, बल्कि परिस्थितियाँ, संगति या क्षणिक आवेश उसे गलत रास्ते पर ले जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार कर के सन्मार्ग पर लौटने की इच्छा जताता है, तो समाज को उसे दुत्कारना नहीं चाहिए। यदि समाज सुधरने वाले व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेगा, तो वह पुनः हताशा में आकर अपराध की ओर कदम बढ़ा सकता है। इसलिए, उसे मुख्यधारा में वापस लाना सामाजिक संतुलन के लिए जरूरी है । एक प्रगतिशील समाज वही है जो केवल दंड देना नहीं, बल्कि सुधार करना जानता हो। बुराई के प्रति सतर्क रहना हमारी बुद्धिमत्ता है, लेकिन सुधरने वाले को गले लगाना हमारी इंसानियत है। जब हम किसी को सुधरने का अवसर देते हैं, तो हम केवल एक व्यक्ति को नहीं बचाते, बल्कि समाज से एक बुराई का अंत कर के एक नए स्वस्थ भविष्य की नींव रखते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

