लेखक : रवि शेखर भारतीय
आरटीआई कार्यकर्ता | सामाजिक कार्यकर्ता | धम्म प्रचारक | संविधान प्रचारक
मेरी आन, बान, शान और सम्मान है “भारत का संविधान”। यह केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के संघर्ष, त्याग, बलिदान और समानता की आकांक्षा का जीवंत दस्तावेज है। यह वह महान सामाजिक अनुबंध है जिसने इस देश के प्रत्येक नागरिक को मनुष्य के रूप में जीने का अधिकार दिया, सम्मान दिया और स्वतंत्रता प्रदान की।
मेरे लिए संविधान किसी अलमारी में रखी हुई किताब नहीं है। संविधान मेरे जीवन का #मार्गदर्शक है, मेरी #चेतना है, मेरा #आत्मविश्वास है और मेरे संघर्षों की #शक्ति है। मैं मानता हूँ कि यदि भारत के प्रत्येक नागरिक को आज समान #मतदान का अधिकार प्राप्त है, यदि कानून की दृष्टि में सभी नागरिक #समान माने जाते हैं, यदि अभिव्यक्ति की #स्वतंत्रता, शिक्षा का #अधिकार, #धार्मिक स्वतंत्रता और #न्याय प्राप्त करने का अधिकार उपलब्ध है, तो इसका श्रेय #भारतकासंविधान को जाता है।
सदियों तक इस देश में अनेक प्रकार की सामाजिक असमानताएँ, भेदभाव, ऊँच-नीच और अन्याय मौजूद रहे। समाज के बड़े वर्गों को शिक्षा, सम्मान और अवसरों से वंचित रखा गया। लेकिन संविधान ने यह घोषणा की कि भारत का प्रत्येक नागरिक समान है और किसी भी व्यक्ति के साथ जन्म, जाति, धर्म, लिंग या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। यही संविधान की सबसे बड़ी क्रांति है।
मैं #गर्व के साथ कहता हूँ कि संविधान ही मेरा #नेता है। मैं किसी #व्यक्ति-विशेष, किसी #जाति, किसी #संप्रदाय या किसी #अंधविश्वास का अनुयायी नहीं हूँ। मेरा #मार्गदर्शन संविधान करता है। संविधान मुझे #वैज्ञानिक_दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। संविधान मुझे #मानवता, #समानता, #बंधुत्व और #न्याय का मार्ग दिखाता है। संविधान मुझे सिखाता है कि किसी भी व्यक्ति को उसके जन्म के आधार पर #छोटा या #बड़ा नहीं माना जा सकता।
भारत का संविधान केवल अधिकारों की बात नहीं करता, बल्कि कर्तव्यों की भी बात करता है। प्रत्येक नागरिक का यह दायित्व है कि वह संविधान का सम्मान करे, उसके आदर्शों का पालन करे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करे। संविधान का पालन करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का #नैतिक और #संवैधानिक_दायित्व है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि संविधान को केवल सरकारी कार्यालयों, न्यायालयों और विद्यालयों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाया जाए। जब नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होंगे, तभी #लोकतंत्र मजबूत होगा। जब लोग संविधान पढ़ेंगे, समझेंगे और उसका पालन करेंगे, तभी सामाजिक न्याय की स्थापना संभव होगी।
एक आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में मेरा अनुभव है कि संविधान और कानून की जानकारी नागरिकों को सशक्त बनाती है। सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, समानता का अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार नागरिकों को शासन में भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं। संविधान जनता को केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि सत्ता से प्रश्न पूछने का साहस भी देता है।
संविधान हमें भयमुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यह हमें सिखाता है कि अन्याय के सामने चुप रहना भी अन्याय को बढ़ावा देना है। इसलिए एक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अन्याय, भ्रष्टाचार, भेदभाव और शोषण के विरुद्ध संवैधानिक तरीकों से आवाज उठाए।
मैं यह मानता हूँ कि संविधान की रक्षा केवल न्यायालयों या सरकारों से नहीं होगी। संविधान की वास्तविक रक्षा तब होगी जब आम नागरिक संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे। जब समाज में समानता, बंधुत्व और न्याय की भावना मजबूत होगी, तब संविधान और लोकतंत्र दोनों सुरक्षित रहेंगे।
मेरा संकल्प है कि जब तक मेरे जीवन में सांस है, तब तक मैं भारत के संविधान का प्रचार-प्रसार करता रहूँगा। मैं लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करता रहूँगा। मैं सामाजिक न्याय, समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानव गरिमा के संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करता रहूँगा।
मैं निडर हूँ, क्योंकि मेरे साथ संविधान है।
मैं निर्भय हूँ, क्योंकि मेरे साथ न्याय का सिद्धांत है।
मैं आत्मसम्मानी हूँ, क्योंकि संविधान ने मुझे सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिया है।
आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि हम भारत के संविधान का सम्मान करेंगे, उसके आदर्शों का पालन करेंगे और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देंगे जहाँ न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व केवल संविधान के शब्द न रह जाएँ, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन की वास्तविकता बन जाएँ।
जय संविधान।
जय भारत।
— रवि शेखर भारतीय
आरटीआई कार्यकर्ता | सामाजिक कार्यकर्ता | धम्म प्रचारक | संविधान प्रचारक।

