मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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रिश्तों की खूबसूरती उनके बाहरी स्वरूप में नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपी पारदर्शिता और ईमानदारी में होती है। जब दो व्यक्तियों के बीच का जुड़ाव छल-कपट की धूल से मुक्त होता है, तो जीवन का नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। हमारी दृष्टि हमारे मन जैसी होती है। यदि मन में ‘मैल’ या ईर्ष्या हो, तो वसंत की हरियाली में भी कमियाँ नज़र आती हैं। इसके विपरीत, यदि नजरिया साफ हो तो हम सामने वाले की खामियों को भी सहजता से स्वीकार कर लेते हैं। सच्चा रिश्ता वह दर्पण है जिसमें हम स्वयं को बिना किसी डर के देख सकते हैं।
पतझड़ प्राकृतिक रूप से खालीपन, झड़ते पत्तों और उदासी का समय होता है, जबकि सावन खुशहाली का समय है। इसी तरह जिस रिश्ते में छल नहीं होता, वहाँ कठिन समय (पतझड़) भी साथ मिलकर काटने में एक विशेष आनंद मिलता है। छल-कपट का अभाव असुरक्षा को खत्म कर देता है। जहाँ मैल नहीं, वहाँ मुश्किल दौर में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छूटता। अंततः, परिस्थितियाँ उतनी मायने नहीं रखतीं, जितना कि साथ चलने वाले का व्यवहार। यदि हृदय निष्पाप हो और मंशा साफ, हो तो जीवन की सूखी टहनियों पर भी प्रेम की हरियाली छाई रहती है। सत्य और निस्वार्थ प्रेम ही वह जादू है, जो पतझड़ को सावन में बदलने का सामर्थ्य रखता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

