Monday, September 28, 2026
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साक्षरता से सशक्तिकरण और सामाजिक विकास : अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

ठाकुर दास मंडी हिमाचल प्रदेश | । साक्षरता एवं जन विकास समिति तथा हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा आज नेरचौक में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर साक्षरता के महत्व, शिक्षा के अधिकार तथा बदलते डिजिटल युग में नई प्रकार की साक्षरता की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

समिति के उपाध्यक्ष जोगिंदर वालिया ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों में साक्षरता के महत्व के प्रति जागरूकता पैदा करना तथा सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयासों को मजबूत करना है। यूनेस्को ने वर्ष 1966 में 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया था और वर्ष 1967 से इसे मनाया जा रहा है। वर्ष 2026 इस दिवस की 60वीं वर्षगांठ है।

उन्होंने कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना सीख जाना नहीं है। साक्षरता व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने, सही जानकारी प्राप्त करने, स्वतंत्र निर्णय लेने, रोजगार एवं आजीविका के अवसर हासिल करने तथा समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी करने में सक्षम बनाती है।

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति की सह-सचिव रीना सिंह ने कहा कि आज के डिजिटल युग में साक्षरता का स्वरूप व्यापक हो गया है। पढ़ने-लिखने के साथ-साथ डिजिटल, वित्तीय, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा मीडिया एवं सूचना साक्षरता भी आवश्यक हो गई है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में सही और गलत सूचना के बीच अंतर करने तथा वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित करने की क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि गरीबी, असमानता और सामाजिक बहिष्कार को दूर करने के लिए शिक्षा और साक्षरता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं, श्रमिकों, किसानों, गरीब परिवारों और वंचित समुदायों के लिए साक्षरता एवं निरंतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक न्याय की महत्वपूर्ण शर्त है।

समिति के सचिव नंद लाल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2026 की थीम “लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता” है। यह थीम साक्षरता को व्यक्ति के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ विकास और बेहतर आजीविका से जोड़ती है।

इस अवसर पर सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज से आह्वान किया गया कि वे हर व्यक्ति तक शिक्षा और साक्षरता पहुंचाने, वयस्क शिक्षा को मजबूत करने तथा डिजिटल और वैज्ञानिक साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करें।

साक्षर समाज ही जागरूक समाज है और जागरूक समाज ही समानता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय तथा टिकाऊ विकास की मजबूत नींव रख सकता है।

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