किसान गर्जना के लगातार विरोध, ज्ञापन और जनजागरण का असर; संगठन ने भावांतर के मुद्दे पर सरकार के रुख में बदलाव को आंदोलन की सफलता बताया
मूकनायक समाचार -/ सत्यशील गोंडाने -/ बालाघाट (मध्यप्रदेश)
बालाघाट। धान उत्पादक किसानों के हितों से जुड़े भावांतर भुगतान योजना के मुद्दे को लेकर किसान गर्जना संगठन द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन ने जिले में किसानों की आवाज को बुलंद किया है। संगठन के जिला अध्यक्ष रामकुमार नगपुरे की पहल और लगातार किसान संपर्क अभियान के चलते भावांतर के मुद्दे को लेकर किसानों की मांग अब व्यापक स्तर पर सामने आई है।
किसान गर्जना संगठन का कहना है कि धान उत्पादक किसानों के हितों को लेकर संगठन ने लगातार गांव-गांव पहुंचकर किसानों से संवाद किया, बैठकें आयोजित कीं तथा शासन-प्रशासन तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए ज्ञापन और आंदोलन का सहारा लिया। संगठन के अनुसार, किसानों की प्रमुख मांग धान के लिए उचित मूल्य और भावांतर व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्णय की रही है।
रामकुमार नगपुरे ने संभाली आंदोलन की कमान
जिला अध्यक्ष रामकुमार नगपुरे के नेतृत्व में किसान गर्जना ने बालाघाट सहित वारासिवनी, लालबर्रा, कटंगी, किरनापुर और आसपास के क्षेत्रों में किसानों के बीच पहुंचकर भावांतर योजना को लेकर जागरूकता अभियान चलाया। संगठन ने किसानों से एकजुट होकर अपनी मांग शासन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
संगठन का कहना है कि किसानों की समस्याओं को केवल ज्ञापन तक सीमित न रखते हुए लगातार जनसंपर्क और आंदोलन के माध्यम से उठाया गया। इसी क्रम में किसानों की आवाज जिला मुख्यालय से लेकर भोपाल तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
सिवनी की घोषणा के बाद बालाघाट में भी उठी आवाज
किसान गर्जना के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी के अनुसार, सिवनी में धान महोत्सव के दौरान भावांतर योजना को लेकर घोषणा के बाद संगठन ने किसानों के हित में अपनी मांग स्पष्ट कर दी थी। संगठन का कहना था कि धान उत्पादक किसानों को ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं होगी, जिससे उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त न हो।
इसके बाद संगठन ने लगातार सरकार के समक्ष भावांतर व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा। किसान गर्जना का कहना है कि किसानों की एकजुटता और लगातार आंदोलन के दबाव के बाद सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ा।
3100 रुपये प्रति क्विंटल’ की मांग पर आंदोलन जारी
किसान गर्जना संगठन ने धान के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की मांग को प्रमुखता से उठाया है। संगठन का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है और भावांतर के मुद्दे पर सरकार को किसानों के हित में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
जिला अध्यक्ष रामकुमार नगपुरे के नेतृत्व में संगठन ने किसानों के बीच यह संदेश पहुंचाया है कि अपनी मांगों को लेकर किसान संगठित रहें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज शासन तक पहुंचाते रहें।
किसानों की आवाज को गांव-गांव पहुंचाने का संकल्प
किसान गर्जना का कहना है कि आंदोलन केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन द्वारा गांव-गांव पहुंचकर किसानों की समस्याएं सुनी जा रही हैं और उन्हें संगठित कर शासन के समक्ष उठाया जा रहा है।
रामकुमार नगपुरे की पहल से जिले में किसान गर्जना की गतिविधियों को गति मिली है। संगठन का दावा है कि भावांतर के मुद्दे पर मिली प्रतिक्रिया किसानों की एकजुटता का परिणाम है। हालांकि किसानों के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की मांग को लेकर संगठन ने आगे भी अपनी आवाज उठाते रहने की बात कही है

