मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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प्रकृति का हर नियम समानता और संतुलन पर आधारित है। सूर्य अपनी धूप, बादल अपना जल और हवा अपनी प्राणवायु बिना किसी भेदभाव के हर जीव को समान रूप से बांटते हैं। प्रकृति में ना कोई राजा है, ना कोई रंक। यहाँ हर तत्व सह-अस्तित्व के शाश्वत नियम का पालन करता है। इसके विपरीत, बुद्धिमान होने का दावा करने वाला मानव समाज आज ईर्ष्या, भेदभाव और अंधविश्वास जैसी अनेक कुरीतियों से ग्रस्त है। मनुष्य ने अपनी असीम लालसा और अहंकार के कारण समाज को जाति, धर्म, लिंग और वर्ग के कृत्रिम दायरों में बांट दिया है। जब व्यक्ति दूसरों की प्रगति को स्वीकार नहीं कर पाता, तो ईर्ष्या का जन्म होता है। यही ईर्ष्या आगे चलकर भेदभाव की गहरी खाई खोदती है।
वहीं, तार्किक सोच की कमी और अज्ञानता के कारण आज समाज अंधविश्वास के अंधकार में डूबा हुआ है, जो सदियों से इंसानी चेतना को बंधक बनाए हुए है। यदि हमें एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज का निर्माण करना है, तो हमें प्रकृति के इस समतावादी संदेश को पुनः अपनाना होगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर ही हम इन कुरीतियों का समूल नाश कर सकते हैं। प्रकृति हमें सिखाती है कि विविधता में ही सौंदर्य है और समानता में ही जीवन का असली आधार है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

