गुरु घासीदास जयंती के आयोजनों के साथ आस्था स्थलों के विकास पर भी हो ठोस पहल
////गिरौदपुरी धाम सहित सतनामी समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की मांग — जनप्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठजनों का ध्यान आकर्षित///
बिलासपुर
छत्तीसगढ़ |
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै
सतनामी समाज के सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न समाजों के प्रमुख लोगों की सहभागिता सामाजिक समरसता और आपसी संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी क्रम में समाज के लोगों ने अब शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों का ध्यान सतनामी समाज की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े स्थलों के विकास एवं संरक्षण की ओर आकर्षित किया है।
संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी का संदेश “मनखे-मनखे एक समान” मानव समानता, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की प्रेरणा देता है। ऐसे में समाज के लोगों का कहना है कि बाबा गुरु घासीदास जी के विचारों को केवल जयंती एवं सार्वजनिक मंचों तक सीमित न रखते हुए उनसे जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास में भी गंभीरता दिखाई जानी चाहिए।
गिरौदपुरी धाम सतनामी समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। समाज की ओर से समय-समय पर यहां की व्यवस्थाओं, रखरखाव, स्वच्छता, आधारभूत सुविधाओं तथा धार्मिक-सांस्कृतिक परिसरों के संरक्षण को लेकर ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है। विशेष रूप से विशाल जैतखाम की रंगाई-पुताई, रखरखाव एवं आवश्यक जीर्णोद्धार जैसे विषयों पर संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की जा रही है।
इसी तरह मारो–चक्रवाय स्थित बाबा गुरु घासीदास जी के मंदिर एवं मेला परिसर के विकास, रखरखाव और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया है।
समाज की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह मांग किसी अन्य समाज, व्यक्ति या जनप्रतिनिधि के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य केवल अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, विकास और श्रद्धालुओं की आवश्यक सुविधाओं को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से शासन-प्रशासन के समक्ष बात रखना है।
जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा
समाज के लोगों ने क्षेत्र के मंत्री, विधायक, सांसद, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों से अपेक्षा की है कि आस्था स्थलों की वर्तमान स्थिति का तथ्यात्मक निरीक्षण कर आवश्यक कार्यों की सूची तैयार की जाए तथा उपलब्ध बजट एवं शासकीय योजनाओं के अनुरूप विकास कार्यों के लिए उचित प्रस्ताव तैयार किए जाएं।
इसके साथ ही समाज के वरिष्ठजनों, संत-महंतों, सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से विकास कार्यों के संबंध में सुझाव लिए जाने की मांग भी सामने आई है।
समाज के वरिष्ठजनों से भी पहल की अपील
सतनामी समाज के वरिष्ठजनों एवं सामाजिक नेतृत्व से भी अपील की गई है कि वे इस विषय को सकारात्मक एवं रचनात्मक तरीके से शासन-प्रशासन के समक्ष रखें और संबंधित विभागों के साथ संवाद स्थापित कर आवश्यक विकास कार्यों के लिए पहल करें।
समाज का कहना है कि जयंती और सामाजिक आयोजनों में बड़े नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों की सहभागिता स्वागत योग्य है, लेकिन इसके साथ समाज की आस्था और विरासत से जुड़े स्थलों के स्थायी विकास पर भी निरंतर ध्यान दिया जाना चाहिए।
मुख्य मांगें
गिरौदपुरी धाम सहित प्रमुख सतनामी आस्था स्थलों का नियमित निरीक्षण एवं संरक्षण।
जैतखाम एवं संबंधित परिसरों की रंगाई-पुताई, रखरखाव और आवश्यक जीर्णोद्धार।
मारो–चक्रवाय मंदिर एवं मेला परिसर में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास।
स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सड़क, पार्किंग एवं श्रद्धालुओं की अन्य आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान।
स्वीकृत विकास कार्यों की प्रगति एवं संबंधित योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की व्यवस्था।
विकास संबंधी निर्णयों में समाज के वरिष्ठजनों एवं स्थानीय नागरिकों से सुझाव लेना।
समाज की ओर से कहा गया है कि “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश सामाजिक जीवन में समान सम्मान और समान सुविधाओं की भावना को मजबूत करता है। इसलिए सतनामी समाज की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्थलों का संरक्षण और विकास भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सतनामी समाज की आस्था का सम्मान हो।
आस्था स्थलों का संरक्षण और विकास हो।
बाबा गुरु घासीदास जी के समानता के संदेश को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए।
समाज के जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठजनों, सामाजिक संगठनों एवं शासन-प्रशासन से सकारात्मक पहल की अपेक्षा है।
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