Monday, September 28, 2026
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किताबें भले ही खुद चुप रहती हैं, लेकिन वे बना देती हैं इंसान को समाज में खुलकर और गर्व से जीने के काबिल

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किताबें ज्ञान का साक्षात स्वरूप होती हैं। वे स्वयं पूरी तरह मौन रहती हैं, लेकिन उनके भीतर शब्दों का एक अनंत संसार छिपा होता है। जब कोई पाठक इन मौन पन्नों को उलटता है, तो वे पन्ने उसके जीवन से बात करने लगते हैं। जिसने भी किताबों को अपना मित्र बना लिया और उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ लिया, उसका भविष्य सुधरना बिल्कुल निश्चित है। किताबों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे बिना कुछ बोले इंसान को सही और गलत का अंतर सिखा देती हैं। महापुरुषों के विचार, वैज्ञानिकों की खोजें और इतिहास के अनुभव किताबों में सिमटे होते हैं।
जब हम किताबों को पढ़ते हैं, तो हमारा दृष्टिकोण व्यापक होता है। यह ज्ञान हमें जीवन के कठिन समय में सही निर्णय लेने की क्षमता देता है, जिससे हमारे करियर और व्यक्तित्व को एक नई दिशा मिलती है। एक अच्छी किताब बंद ताले की उस चाबी की तरह है, जो सफलता के बंद दरवाजों को खोल देती है। यह इंसान के भीतर छिपे अज्ञान के अंधेरे को मिटाकर आत्मविश्वास और समझदारी का प्रकाश फैलाती है। संक्षेप में कहें तो, किताबें भले ही खुद चुप रहती हैं, लेकिन वे इंसान को समाज में खुलकर और गर्व से जीने के काबिल बनाती हैं। जो व्यक्ति किताबों से रिश्ता जोड़ लेता है, वह जीवन की हर परीक्षा में सफल होकर अपना उज्ज्वल भविष्य खुद लिख लेता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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