मूकनायक / रिपोर्टर धर्मवीर गौतम / करौली
करौली। करौली जिले की नगरीय राजनीति में सोमवार, 21 सितंबर 2026 का दिन काफी अहम रहा। जिले के नगर परिषद और नगर पालिकाओं में सभापति एवं अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।
करौली जिले के छह शहरी निकायों में से हिण्डौन नगर परिषद में सभापति का चुनाव पहले ही निर्विरोध हो चुका था, जबकि सोमवार को करौली नगर परिषद सहित सपोटरा, मंडरायल, सूरौठ और टोडाभीम नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद के चुनाव हुए। अब इन सभी निकायों में अगली राजनीतिक परीक्षा उपसभापति और उपाध्यक्ष पद के चुनाव की होगी।
करौली नगर परिषद में कांग्रेस की वापसी
करौली नगर परिषद के 55 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के सुनील सैनी ने सभापति पद पर जीत दर्ज की। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों के अनुसार सुनील सैनी को 30 मत, जबकि भाजपा के वीरेंद्र शर्मा को 25 मत मिले। इस तरह सुनील सैनी ने 5 मतों से जीत दर्ज की।
करौली परिषद में चुनाव से पहले कांग्रेस के 28, भाजपा के 11 और 15 निर्दलीय पार्षद थे। उपलब्ध स्रोतों में एक सीट को लेकर दलगत वर्गीकरण में अंतर दिखाई देता है, इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि उपसभापति पद पर किस दल या खेमे का प्रत्याशी बाजी मारता है? सभापति चुनाव के बाद परिषद की अगली राजनीतिक तस्वीर उपसभापति चुनाव से और स्पष्ट होगी।
सपोटरा में भाजपा की सपना बैरवा विजयी
सपोटरा नगर पालिका में भाजपा की सपना बैरवा ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया।
20 सदस्यीय नगरपालिका में भाजपा के 15 पार्षद, कांग्रेस के 3 और निर्दलीय 2 पार्षद थे। अध्यक्ष पद के चुनाव में सपना बैरवा को 16 वोट, जबकि कांग्रेस की कविता महावर को 4 वोट मिले। रिटर्निंग अधिकारी ने परिणाम घोषित कर सपना बैरवा को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपा।
यहां भाजपा के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत था, इसलिए अध्यक्ष पद का चुनाव उसके पक्ष में रहा। अब देखना होगा कि उपाध्यक्ष पद के लिए पार्टी किसे जिम्मेदारी देती है।
मंडरायल में कांग्रेस की तुलसा देवी बनीं पहली अध्यक्ष
नवनिर्मित मंडरायल नगर पालिका के लिए अध्यक्ष पद का चुनाव भी खास रहा। यहां कांग्रेस की तुलसा देवी और भाजपा की शकुंतला देवी आमने-सामने थीं।
मंडरायल नगर पालिका में कुल 20 वार्ड हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस के 10, भाजपा के 8 और 2 निर्दलीय पार्षद थे। यानी कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से केवल एक सीट दूर थी और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
अंतिम अध्यक्ष चुनाव में तुलसा देवी ने जीत दर्ज कर मंडरायल नगर पालिका की पहली अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया।
अब यहां भी नजर उपाध्यक्ष चुनाव पर रहेगी, क्योंकि 20 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के पास 10 पार्षद होने के कारण निर्दलीयों की भूमिका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सूरौठ में भाजपा की कमला महावर का कब्जा
सूरौठ नगर पालिका के पहले अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा की कमला महावर ने जीत दर्ज की।
20 सदस्यीय सूरौठ नगर पालिका में चुनाव से पहले 16 निर्दलीय, भाजपा के 2 और कांग्रेस के 2 पार्षद थे। इसके बावजूद अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा की कमला को 11 वोट, जबकि सोमोती को 9 वोट मिले। कमला महावर ने 2 वोट से जीत हासिल की।
यह परिणाम सूरौठ की राजनीति में खास इसलिए है क्योंकि यहां किसी एक दल के पास बहुमत नहीं था और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक रही।
अब सूरौठ में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपाध्यक्ष पद पर किस समीकरण से बाजी बनेगी?
टोडाभीम में निर्दलीय ललिता देवी ने चौंकाया
टोडाभीम नगर पालिका में अध्यक्ष पद का मुकाबला त्रिकोणीय रहा। मैदान में कांग्रेस की संगीता कुण्डारा, भाजपा की ज्योति महावर और निर्दलीय ललिता देवी थीं।
35 सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 14, भाजपा के 6 और निर्दलीय 15 पार्षद थे। बहुमत के लिए 18 पार्षदों की जरूरत थी। ऐसे समीकरण में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी।
चुनाव में निर्दलीय ललिता देवी ने जीत दर्ज कर टोडाभीम नगर पालिका की पहली अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया।
टोडाभीम में अब उपाध्यक्ष चुनाव सबसे ज्यादा दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि यहां किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है और निर्दलीय पार्षदों की संख्या बड़ी है।
हिण्डौन में विजय कुमारी पहले ही निर्विरोध सभापति
हिण्डौन नगर परिषद में सभापति पद का चुनाव 21 सितंबर से पहले ही निर्विरोध हो चुका था। भाजपा की विजय कुमारी चतुर्वेदी निर्विरोध सभापति चुनी गईं। नाम वापसी के बाद मैदान में कोई दूसरा प्रत्याशी नहीं बचा था।
हिण्डौन नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। उपलब्ध परिणामों के अनुसार भाजपा के 12, कांग्रेस के 9 और 39 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे।
ऐसे में यहां भी उपसभापति चुनाव का गणित खासा महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि सदन में निर्दलीय पार्षदों की संख्या सबसे अधिक है।
अब अगली नजर उपसभापति पर
करौली जिले के सभी छह शहरी निकायों में अध्यक्ष और सभापति पद की तस्वीर सामने आने के बाद अब राजनीतिक दलों और पार्षदों का ध्यान उपसभापति/उपाध्यक्ष चुनाव पर टिक गया है।
खास तौर पर तीन निकायों में गणित बेहद दिलचस्प है—
करौली: कांग्रेस के पास सभापति पद की जीत के बाद अब उपसभापति के लिए भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी।
सूरौठ: यहां 16 निर्दलीय पार्षद होने के कारण उपाध्यक्ष चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका अहम रहने वाली है।
टोडाभीम: 15 निर्दलीय पार्षदों वाले सदन में उपाध्यक्ष चुनाव का समीकरण सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगा।
वहीं सपोटरा में भाजपा के पास 15 पार्षद होने के कारण उसका संगठनात्मक बहुमत मजबूत है, जबकि मंडरायल में कांग्रेस 10 सीटों के साथ बहुमत से केवल एक कदम दूर है और दो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
करौली जिले की निकाय राजनीति का पूरा नतीजा
निकाय| निर्वाचित सभापति/अध्यक्ष| दल
हिण्डौन नगर परिषद| विजय कुमारी चतुर्वेदी| भाजपा
करौली नगर परिषद| सुनील सैनी| कांग्रेस
सपोटरा नगर पालिका| सपना बैरवा| भाजपा
मंडरायल नगर पालिका| तुलसा देवी| कांग्रेस
सूरौठ नगर पालिका| कमला महावर| भाजपा
टोडाभीम नगर पालिका| ललिता देवी| निर्दलीय
अब अध्यक्षों की तस्वीर साफ है, लेकिन करौली जिले की नगरीय राजनीति की अगली बाजी उपसभापति और उपाध्यक्ष चुनाव में देखने को मिलेगी।
किस निकाय में किसे उपाध्यक्ष बनाया जाता है, कौन पार्षद किसके साथ जाता है और निर्दलीय पार्षद किस तरफ खड़े होते हैं—इन सवालों के जवाब अगले चरण में सामने आएंगे।
करौली जिले की निकाय राजनीति पर हमारी नजर बनी हुई है।

