Monday, September 28, 2026
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अब बनेगा आवारा पशुओं और कुत्तों का डिजिटल रिकॉर्ड

मूकनायक‌ / सुरेश सिंह बैस

बिलासपुर छत्तीसगढ़।

नगर सहित प्रदेश के सभी शहरी इलाकों में घूम रहे आवारा पशुओं और कुत्तों की बढ़ती समस्या पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने अब पूरी तरह डिजिटल और सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब हर गली-मोहल्ले के आवारा मवेशियों और श्वान (कुत्तों) का पूरा ब्योरा ऑनलाइन दर्ज होगा। भारत पशुधन पोर्टल पर होगा पंजीकरण: प्रदेश के सभी नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत) को अपने क्षेत्र के आवारा पशुओं का रजिस्ट्रेशन ‘भारत पशुधन पोर्टल’ पर अनिवार्य रूप से करना होगा।

नसबंदी और टीकाकरण का लेखा-जोखा

इस पोर्टल पर केवल पशुओं की गिनती ही नहीं होगी, बल्कि 1 अप्रैल से उनके द्वारा की गई नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण की हर गतिविधि का ऑनलाइन रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।‌ एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटरों की मैपिंग: पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत संचालित एबीसी सेंटरों की जानकारी और वहां होने वाली गतिविधियों को भी पोर्टल पर लाइव अपडेट किया जाएगा।

क्यों पड़ी इस डिजिटल व्यवस्था की जरूरत?
बढ़ते आंकड़े और खतरे

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल सिम्स अस्पताल में पिछले एक सप्ताह के भीतर कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए 459 लोग पहुंचे। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी रोजाना 10 से 15 नए मरीज पहुंच रहे हैं।

प्रशासनिक सख्ती

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश क्षीरसागर ने निर्देश दिए हैं कि विभाग को 1 अप्रैल से सितंबर तक की गई नसबंदी और टीकाकरण का पूरा डेटा पोर्टल पर देना होगा, जिससे पिछले 6 महीनों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके।

इन इशारा पशुओं की नसबंदी के बावजूद चुनौती

नगर निगम का दावा है कि पिछले 10 वर्षों में 22 हजार से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है, लेकिन बारिश के मौसम में ब्रीडिंग सीजन होने के कारण कुत्तों का आक्रामक व्यवहार और झुंड में घूमना आम हो गया है।

इन इलाकों में मिल रही हैं सबसे ज्यादा शिकायतें

शहर के पुराना बस स्टैंड, इमलीधारा, पुलिस लाइन रोड, हेमू नगर, शनिचरी बाजार, सरकंडा, कुदुदंड और तालापारा जैसे क्षेत्रों से आवारा कुत्तों के झुंड और राहगीरों तथा दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। शिकायत मिलने पर निगम की टीम गोकुलधाम पशु चिकित्सालय ले जाकर नियमों के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में नसबंदी करवाती है और फिर उन्हें वापस उसी क्षेत्र में छोड़ देती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

कुत्ते के काटने या खरोंच मारने पर लापरवाही बिल्कुल न बरतें। घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक की सलाह लें व समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाएं, ताकि संक्रमण के गंभीर खतरे से बचा जा सके।

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