मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
अपने जीवनसाथी (पति या पत्नी) की तुलना किसी अन्य व्यक्ति से करना, एक सुखी और हंसते-खेलते वैवाहिक जीवन को तबाह करने के समान है। विवाह का आधार आपसी प्रेम, सम्मान और स्वीकार्यता पर टिका होता है। जब हम अपने साथी की तुलना दूसरों के रूप-रंग, धन, स्वभाव या सफलताओं से करने लगते हैं, तो हम अनजाने में उनके आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुँचाते हैं। हर मनुष्य अपने आप में अनूठा होता है। हर किसी की परिस्थितियाँ, खूबियाँ और कमियाँ अलग होती हैं। जब एक पार्टनर दूसरे को किसी और जैसा बनने के लिए दबाव डालता है, तो रिश्ते में असुरक्षा, हीनभावना और कड़वाहट पैदा होने लगती है। इससे आपसी संवाद बंद हो जाता है और विश्वास की दीवार ढहने लगती है।
तुलना करने से घर का शांतिपूर्ण माहौल तनाव और झगड़ों में बदल जाता है। यह प्रवृत्ति खुशहाल परिवार में धीरे-धीरे असंतोष की आग लगा देती है, जो अंततः रिश्ते को जलाकर राख कर देती है। एक आदर्श वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी है कि हम अपने जीवनसाथी को उनकी कमियों के साथ स्वीकार करें। दूसरों की झूठी चमक देखने के बजाय, अपने साथी के समर्पण और प्रेम की सराहना करनी चाहिए, क्योंकि सच्चा सुख तुलना में नहीं बल्कि संतोष और आपसी तालमेल में है ।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

