न्यूज़ छत्तीसगढ़
सतनाम भवन की भूमि को लेकर सतनामी समाज ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
बिलासपुर
मूकनायक
कमलेश लवहात्रै
छत्तीसगढ़ प्रभारी
तखतपुर/लाखासार। ग्राम लाखासार, तहसील तखतपुर, जिला बिलासपुर में स्थित खसरा नंबर 1331/2 की भूमि को लेकर सतनामी समाज और प्रशासन के बीच मामला चर्चा में है। समाज के लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत लाखासार की ग्राम सभा बैठक में दिनांक 31 जुलाई 2015 को उक्त भूमि के संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया था। समाज के अनुसार प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था और इसके बाद खसरा नंबर 1331/2 के कुछ हिस्से में सतनाम भवन, मंच आदि का निर्माण किया गया।
समाज के अनुसार सतनाम भवन के आसपास की कुछ भूमि लंबे समय से खाली पड़ी थी। आरोप है कि भवन से लगी खाली भूमि में मिट्टी की खुदाई किए जाने के बाद वहां गड्ढा बन गया और बाद में उसमें मछली पालन किया जाने लगा। समाज का कहना है कि पानी भरने और भूमि के प्रभावित होने के कारण सतनाम भवन के कुछ हिस्सों में बैठने की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे भवन के खिड़की-दरवाजे खोलने में भी परेशानी हो रही है।
मामले को लेकर सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने बिलासपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जांच और उचित कार्रवाई की मांग की। समाज के मुताबिक कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तहसील प्रशासन द्वारा पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक को मौके का निरीक्षण कर पंचनामा रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए।
समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि मौके पर तैयार की गई पंचनामा रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति का सही उल्लेख नहीं किया गया तथा एक व्यक्ति के पक्ष में कब्जा दर्शाया गया, जबकि उनके अनुसार संबंधित व्यक्ति का मौके पर किसी प्रकार का कब्जा नहीं है। समाज का यह भी कहना है कि पंचनामा तैयार करते समय उपस्थित आवेदकों के हस्ताक्षर नहीं लिए गए।
सतनामी समाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय राजस्व जांच कराने की मांग की है। समाज का कहना है कि खसरा नंबर 1331/2 से संबंधित वर्ष 2015 के ग्राम सभा प्रस्ताव, वर्तमान राजस्व अभिलेख, मौके की वास्तविक स्थिति तथा पंचनामा रिपोर्ट की जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
समाज ने प्रशासन से मांग की है कि यदि भूमि पर किसी प्रकार का अनधिकृत कब्जा या उपयोग पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा सतनाम भवन और उससे संबंधित भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे आंदोलन करने पर विचार करेंगे।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों के कथन हैं। आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच एवं संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


