Tuesday, September 29, 2026
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ई-जीरो FIR की बड़ी कार्रवाई: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का अंतरराज्यीय नेटवर्क बेनकाब

17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश, 12 साइबर ठग गिरफ्तार, 54.84 लाख रुपये की राशि जब्त

मूकनायक/विष्णु शिंदे/देवास पीपलरावा

देवास। मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर फ्रॉड के विरुद्ध जारी नवाचारी पहल “ई-जीरो FIR” के तहत देवास पुलिस ने बड़ी और प्रभावी कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 17 राज्यों के 33 जिलों में कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से ठगी की 54 लाख 84 हजार 725 रुपये की राशि जब्त की है।

इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए देवास पुलिस के 70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमों ने लगातार 127 दिनों तक अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई की तथा आरोपियों की तलाश और साक्ष्य जुटाने के दौरान करीब 58 हजार 315 किलोमीटर की दूरी तय की।

पुलिस के अनुसार थाना कोतवाली क्षेत्र के एक निवासी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 63.52 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी। शिकायत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर प्राप्त होने के बाद थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 192/2026 धारा 318(4), 316(2), 319(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि अज्ञात आरोपियों ने फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर फरियादी को डराया। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में फंसाने और गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए फर्जी जांच प्रक्रिया चलाई। वीडियो कॉल के माध्यम से कथित न्यायालय का दृश्य दिखाकर फरियादी से उसकी और उसके परिवार की बैंकिंग एवं निवेश संबंधी जानकारी हासिल की गई। इसके बाद जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराई गई।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीजी उज्जैन जोन श्री राकेश गुप्ता एवं डीआईजी उज्जैन रेंज श्री नवनीत भसीन द्वारा देवास पुलिस को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक देवास श्री पुनीत गेहलोद के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई।

तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री जयवीर सिंह भदौरिया एवं वर्तमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री गजेन्द्र सिंह वर्धमान के मार्गदर्शन तथा नगर पुलिस अधीक्षक देवास श्री सुमित अग्रवाल के निर्देशन में थाना प्रभारी कोतवाली उप पुलिस अधीक्षक श्री श्यामचंद्र शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बैंकिंग ट्रांजेक्शन, खाताधारकों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, बैंक सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया।

जांच के दौरान बैंक खातों की एक-एक परत की पड़ताल करते हुए पुलिस ठगी के इस नेटवर्क की आगे की कड़ियों तक पहुंचती गई। इसके बाद राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, दिल्ली सहित देश के कुल 17 राज्यों के 33 जिलों में पुलिस टीमों ने आरोपियों के संभावित ठिकानों, बैंक शाखाओं और अन्य स्थानों पर स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश दी।

12 आरोपी गिरफ्तार

इस कार्रवाई में पुलिस ने राजस्थान, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में भूराराम राव, भालाराम मेघवाल, नाजिम खान, थोटकुरा हर्षवर्धन साई नरसिंह वर्मा, वैभव शुक्ला, मुकराला मेघा अविनाश, आयुष गुप्ता, केयूर कुमार, कमल कांति, मोहम्मद अब्दुल्ला, अनिल कुमार और गिरीश कुमार येलेंटी शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 54,84,725 रुपये की राशि जब्त की है। इसके साथ ही बैंक खातों, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की गई है।

कार्रवाई के प्रमुख बिंदु

  • 70 पुलिसकर्मियों की कुल 19 टीमें
  • 12 साइबर ठग गिरफ्तार
  • कुल जब्त राशि 54,84,725 रुपये
  • 17 राज्यों के 33 जिलों में कार्रवाई
  • लगातार 127 दिनों तक अंतरराज्यीय अभियान
  • पुलिस टीमों ने तय की 58,315 किलोमीटर की दूरी

डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं

देवास पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल पर संपर्क करे और गिरफ्तारी का भय दिखाए, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य अपराध में फंसाने की धमकी दे अथवा जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे तो घबराएं नहीं और किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें।

पुलिस ने नागरिकों से किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने अथवा निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करने की अपील की है।

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