मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के आधुनिक और डिजिटल युग में जहाँ तकनीक ने दूरियाँ मिटा दी हैं, वहीं विडंबना यह है कि लोगों के दिलों के बीच दूरियाँ भी बढ़ गई हैं। इसका मुख्य कारण हमारी भाषा में घटती मर्यादा और संवाद से लुप्त होती मिठास है। यदि हमें अपने समाज, परिवार और मानवीय मूल्यों की रक्षा करनी है, तो हमें अपनी वाणी को संयमित और मधुर बनाना ही होगा। समाज और परिवार में आत्मीयता का आधार मीठी वाणी है, जब बातचीत में आदर और मिठास खत्म हो जाती है, तो छोटे-छोटे मतभेद बड़े विवादों का रूप ले लेते हैं। संवाद की मधुरता रिश्तों को टूटने से बचाती है। कटु और अमर्यादित भाषा समाज में द्वेष, घृणा और वैमनस्य फैलाती है। इसके विपरीत, संयमित और शालीन शब्द, विरोधी को भी मित्र बनाने की क्षमता रखते हैं।
इसलिए बच्चों को शुरुआत से ही शिष्टाचार, आदर सूचक शब्दों के प्रयोग और धैर्यपूर्वक सुनने की आदत डालनी चाहिए। सोशल मीडिया पर बढ़ती अभद्रता और कटुता पर अंकुश लगाकर मर्यादापूर्ण संवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मीठी वाणी वह औषधि है, जो बिना किसी लागत के बड़े से बड़े घाव भर सकती है। समाज को विघटन से बचाने और आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ वातावरण देने के लिए हमें अपनी भाषा की गरिमा को पहचानना होगा। जब हमारे शब्दों में मिठास और व्यवहार में मर्यादा होगी, तभी एक सभ्य, संवेदनशील और मजबूत समाज का निर्माण संभव है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

