ओवरलोड छोटे वाहन, बिना पहचान की स्कूल गाड़ियां और नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल, ग्रामीण अभिभावकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
मूकनायक/ विष्णु शिंदे
देवास /मध्य प्रदेश
पीपलरावा देवास। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर परिवहन विभाग द्वारा देवास शहर में स्कूल बसों की सघन जांच कर चार बसों पर कार्रवाई करते हुए 18 हजार रुपये का शमन शुल्क वसूला गया। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों और प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) से जुड़ी कमियां मिलने पर चालानी कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग की टीम ने बीसीएम स्कूल, किंडर स्कूल, यूनानी कॉलेज, चैतन्य टेक्नो सहित अन्य शिक्षण संस्थानों की बसों का निरीक्षण कर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की।
हालांकि, शहर में हुई इस कार्रवाई के बाद अब सोनकच्छ, पीपलरावां, गंधरपुरी, खेरिया सहित ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूल परिवहन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि कई निजी स्कूलों के छोटे वाहन क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर प्रतिदिन आवागमन कराते हैं। कई वाहनों पर स्कूल का नाम तक अंकित नहीं होता, जिससे दुर्घटना या किसी अन्य स्थिति में वाहन की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन सभी छोटे स्कूल वाहनों के पास वैध परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं? कई वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र तथा अन्य जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
इसी बीच पीपलरावां क्षेत्र में संचालित एक निजी स्कूल को लेकर भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि उक्त स्कूल का स्वीकृत क्षेत्र टोंकखुर्द होने के बावजूद पिछले लगभग तीन वर्षों से पीपलरावां क्षेत्र में नर्सरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। यदि यह तथ्य सही हैं, तो सवाल उठता है कि संबंधित विभाग ने अब तक इस मामले की जांच या कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, अथवा जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है?
क्षेत्रीय नागरिकों और अभिभावकों की मांग है कि जिस प्रकार देवास शहर में स्कूल वाहनों की सघन जांच की जा रही है, उसी प्रकार सोनकच्छ, पीपलरावां, गंधरपुरी, खेरिया एवं अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाकर स्कूल बसों और छोटे वाहनों की जांच की जाए। साथ ही संबंधित स्कूलों की मान्यता, संचालन क्षेत्र, परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की निष्पक्ष जांच कर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

