मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जब कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के आँसू पोंछता है, किसी के अंधेरे जीवन में आशा का उजाला बनता है और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करता है, तब उसका जीवन केवल साधारण जीवन ना रहकर वंदनीय बन जाता है । दूसरों की पीड़ा को समझना और उसे दूर करने का प्रयास करना ही मानवता का सर्वोच्च रूप है। जब हम किसी निराश या दुखी व्यक्ति का सहारा बनते हैं तो उसे ना केवल सांत्वना मिलती है, बल्कि उसका समाज पर से विश्वास भी पुनर्जीवित होता है। ठीक उसी प्रकार, जैसे अँधेरी रात में एक छोटा सा दीपक पूरे मार्ग को रोशन कर देता है, वैसे ही हमारा एक छोटा सा नेक कार्य किसी भटके या हताश व्यक्ति के लिए मार्गदर्शन का काम कर सकता है।
ज्ञान, प्रेम और सहयोग का यह उजाला किसी के जीवन की दिशा बदल सकता है क्योंकि निस्वार्थ सेवा वह माध्यम है, जो आत्मा को परम शांति देती है। जब सेवा में कोई व्यक्तिगत लाभ या सम्मान पाने की लालसा नहीं होती, तो वह कार्य प्रकृति के समान पवित्र हो जाता है। इतिहास गवाह है कि समाज ने हमेशा उन्हीं लोगों को याद रखा और पूजा है, जिन्होंने अपने जीवन को दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। स्वार्थी जीवन तो समय के साथ मिट जाता है, लेकिन परोपकार की महक युगों-युगों तक बनी रहती है और ऐसा जीवन ना केवल जीने वाले को आंतरिक आनंद देता है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत और वंदनीय बन जाता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

