सेवानिवृत्ति के बाद भी 13 वर्षों से बच्चों को प्रेरित कर रहे रामराव ढोक
////स्वतंत्रता दिवस पर मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान कर बढ़ा रहे शिक्षा और संस्कार की भावना////
बिलासपुर छत्तीसगढ़
कमलेश लवहात्रै
छत्तीसगढ़ प्रभारी
खेडीकला, जिला पांढुर्णा। समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो सेवानिवृत्ति के बाद भी अपनी जिम्मेदारियों से स्वयं को अलग नहीं करते, बल्कि अपने अनुभव और संसाधनों का उपयोग नई पीढ़ी को प्रेरित करने में करते हैं। ऐसे ही प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं ग्राम खेडीकला निवासी रामराव ढोक।
सन् 1953 में ग्राम खेडीकला में जन्मे रामराव ढोक ने सन् 1974 में दूरसंचार विभाग में अपनी सेवाएं प्रारंभ कीं। विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने अपनी कार्यशैली, मिलनसार व्यवहार और कर्तव्यनिष्ठा से उच्च अधिकारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के बीच भी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 2013 में वे सहायक महाप्रबंधक (बीएसएनएल), दुर्ग (छत्तीसगढ़) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने पैतृक गांव खेडीकला लौट आए। लेकिन उनका सामाजिक जुड़ाव यहीं समाप्त नहीं हुआ। पिछले 13 वर्षों से वे लगातार प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर खेडीकला शाला के आमंत्रण पर ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं।
रामराव ढोक द्वारा विद्यालय की कक्षा पांचवीं, आठवीं और दसवीं के चयनित छात्र-छात्राओं को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया जाता है। वहीं दसवीं कक्षा के विद्यार्थी को विशेष रूप से हाथ घड़ी भेंट कर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उनका यह प्रयास विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति लगन, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रेरक माध्यम बन गया है।
15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी रामराव ढोक ने विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर कक्षा पांचवीं की खुशी धुर्वे, कक्षा आठवीं के रोमीत ईवनाती तथा कक्षा दसवीं के पार्थ भगत को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अतिथिगण अरुण ईवनाती, धनराज कुमरे, विजय पारडसिंगे, बाबुराव अलोने, रमेश ढोक, धनराज सहारे, रतन पुसे एवं चरणदास ढोक सहित विद्यालय के शिक्षकगण अशोक सोमकुवर, सुनीलदास वैष्णव, प्रकाश खवसकर, सुनंदा देशभ्रतार, अर्चना शिवहरे, ज्योति भूसारे, महादेव कवडेती, अरविंद खापरे एवं अशोक ठाकरे तथा ग्राम खेडीकला के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रामराव ढोक का यह निरंतर प्रयास इस बात का उदाहरण है कि सेवानिवृत्ति किसी व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी का अंत नहीं, बल्कि समाज को अपने अनुभव लौटाने का एक नया अवसर हो सकता है। पिछले 13 वर्षों से स्वतंत्रता दिवस पर विद्यार्थियों का सम्मान कर वे न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ा रहे हैं, बल्कि गांव में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत कर रहे हैं।
“एक विद्यार्थी का सम्मान, अनेक विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान दे सकता है”—रामराव ढोक का यह प्रयास वास्तव में नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
उक्त जानकारी ग्राम खेडीकला के मूल निवासी एवं पूर्व दूरसंचार अधिकारी रामराव ढोक ने दी।


